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कब है साल 2025 की पहली अमावस्या? 144 साल बाद बन रहा ये दुर्लभ संयोग, जानें तिथि और महत्व

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First Amavasya of the Year 2025: साल 2025 की पहली अमावस्या यानी मोनी अमावस्या न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका ज्योतिषीय महत्व भी अत्यधिक है. इस दिन बन रहे सिद्ध योग और महाकुंभ के शाही स्नान जैसे दुर्लभ संयोग इसे और भी…और पढ़ें

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29 जनवरी को साल 2025 की पहली अमवस्या इस दिन बन रहे शुभ योग.

परमजीत /देवघर: नया साल 2025 शुरू हो चुका है और इस साल की पहली अमावस्या बेहद खास होने जा रही है. इस अमावस्या पर एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो पूरे 144 साल बाद देखने को मिलेगा. इस दिन का महत्व न केवल पितरों को समर्पित है, बल्कि इसमें स्नान, दान और पवित्र कर्मों का भी विशेष महत्व है. आइए जानते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल से कि यह खास अमावस्या कब है और इस दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं.

कब है साल 2025 की पहली अमावस्या?
ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुदगल के अनुसार, साल 2025 की पहली अमावस्या 29 जनवरी को पड़ रही है.

तिथि का समय:
अमावस्या तिथि की शुरुआत: 28 जनवरी 2025, शाम 7:29 बजे.
तिथि का समापन: 29 जनवरी 2025, शाम 6:25 बजे.
उदयातिथि के आधार पर स्नान और व्रत का दिन: 29 जनवरी 2025.
मोनी अमावस्या और महाकुंभ का दुर्लभ संयोग
इस साल की पहली अमावस्या खास इसलिए है क्योंकि यह मोनी अमावस्या है और इसी दिन प्रयागराज में महाकुंभ का दूसरा शाही स्नान होगा.

महाकुंभ का महत्व:
144 साल बाद हो रहे महाकुंभ में शाही स्नान को अत्यधिक पुण्यदायी माना गया है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस दिन शाही स्नान करने से जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल सकती है. मोनी अमावस्या पर गंगा स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आत्मिक शांति प्राप्त होती है. इस बार की अमावस्या पर सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है, जो इस दिन को और भी शुभ बनाता है.

सिद्ध योग का समय:
यह योग 29 जनवरी को सुबह से लेकर रात 8:55 बजे तक रहेगा. इस योग में किए गए स्नान, दान और तर्पण का पुण्य कई गुना अधिक होता है. इस योग में गंगा स्नान करने और पितरों को तर्पण अर्पित करने से पितृ दोष दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है.
अमावस्या के दिन क्या करें?
सुबह गंगा स्नान करें या घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके पितरों को तर्पण अर्पित करें. तिल, अन्न, और वस्त्र का दान करें. शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के लिए तिल का दान अत्यंत लाभकारी है. पवित्र मंत्रों का जाप करें. भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें.इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और दूसरों को भी भोजन कराएं. मोनी अमावस्या का अर्थ है मौन रहकर ध्यान और साधना करना. इस दिन का महत्व केवल बाहरी कर्मकांडों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मिक शांति के लिए भी इसे उत्तम माना गया है. यह दिन पितरों को प्रसन्न करने का है, जिससे उनकी कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है.

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कब है साल 2025 की पहली अमावस्या? 144 साल बाद बन रहा ये दुर्लभ संयोग, जानें डेट

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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