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किस उम्र तक कर सकते हैं हज और उमरा… क्या है दोनों में अंतर? यहां जानें सब

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Difference Between Hajj And Umrah : हर धर्म में पूजा-पाठ करने का अपना एक तरीका होता है. सनातन धर्म में भगवान को प्रसन्न करने के लिए जिस तरह से लोग चारधाम यात्रा करते हैं ठीक उसी तरह से इस्लाम को मानने वाले हज और उमराह…और पढ़ें

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आखिर किस उम्र मे कर सकते हैं हज और उमराह, क्या होता है इन दोनों मे अंतर

अलीगढ़. इस्लाम में हज और उमराह करने का काफी ज्यादा महत्व है. इसलिए दुनिया भर से लाखों की तादाद में मुस्लिम समुदाय के लोग हज, उमराह करने सऊदी अरब पहुंचते हैं. हज और उमराह करने के लिए भारत से भी काफी बड़ी तादाद में मुस्लिम समुदाय के लोग जाते हैं. हज और उमराह करने के लिए कोई उम्र की सीमा नहीं है. लेकिन न्यूनतम उम्र की शर्तें होती है. आमतौर पर बच्चों को तभी हज या उमराह के लिए ले जाया जा सकता है जब वह शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम हो. यदि आयु 18 वर्ष से कम है तो उनको अपने परिवार के साथ ही जाना होता है. 18 वर्ष से ऊपर के लोग स्वतंत्र रूप से इसे कर सकते हैं.

इस्लामिक स्कॉलर मौलाना उमर खान ने बताया कि हज या उमराह दोनों के लिए सऊदी अरब जाना पड़ता है. हज या उमराह करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती. बच्चा, बूढ़ा या जवान कोई भी किसी भी उम्र का इंसान जा सकता है. इसके लिए उम्र की कोई पाबंदी नहीं होती. हज और उमराह दोनों के लिए ही मुसलमान सऊदी अरब के सबसे पुराने शहर मक्का जाते हैं. लेकिन बड़ा अंतर यह है कि उमराह पूरी साल किया जा सकता है लेकिन हज करने का एक निश्चित समय होता है.

हज यात्रा इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने में की जाती है और यह कई दिनों तक चलती है साथ ही यह ज्यादा खर्चीली भी होती है. उमराह और हज दोनों में मक्का के पवित्र स्थल शामिल हैं, फिर भी दोनों के बीच अंतर हैं. जैसे उमराह इबादत का एक काम है. फ़र्ज़ (अनिवार्य) नहीं है. जबकि हज इस्लाम के 5 स्तंभों में से एक है और हर उस सक्षम मुसलमान के लिए अनिवार्य है जिसके पास यात्रा करने के लिए पर्याप्त पैसे, वित्तीय साधन हैं.

हज और उमरा में अंतर
मौलाना उमर खान ने बताया कि इस्लाम में जो खुदा के द्वारा मुसलमानो के लिए जो पांच फर्ज बताए गए हैं. जिनमे कलमा, नमाज, रोजा, हज और ज़कात शामिल हैं. हज उन सभी लोगों पर फर्ज है जो साहिबे हैसियत (मालदार ) हो. अगर ऐसे लोग हज नहीं करेंगे और मर जाएंगे तो वह गुनहगार कहलाएंगे. इस्लाम में जो लोग उमरा करते हैं वह भी बहुत अच्छी बात है लेकिन उमरा करना फर्ज नहीं है. उमराह निफले इबादत है. यानी कि उमरा करना अच्छी बात है, सबाब का काम है और न करने पर कोई गुनाह नहीं है.

हज के लिए ये काम है जरूरी
इसी तरह से हज और उमरे में कई तरह के फर्क हैं. जैसे आप हज करेंगे तो आपको कुर्बानी जरूर करानी पड़ेगी और आपको शैतान को पत्थर मारना पड़ेगा. आपको अराफात के मैदान में ठहरना पड़ेगा. जबकि उमराह करने के लिए ऐसा कुछ नहीं है. हज केवल ईद उल अज़हा के दौरान किया जाता है. जबकि उमरा हज के दिनों को छोड़कर पूरे साल में कभी भी किया जा सकता है.

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किस उम्र तक कर सकते हैं हज और उमरा… क्या है दोनों में अंतर? यहां जानें सब

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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