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कृष्ण के अष्टसखी में कौन थीं सबसे प्रिय? खरगोन के इस मंदिर में संग-संग हैं विराजमान! दुर्लभ हैं ऐसे धाम…

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Agency:Bharat.one Madhya Pradesh

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Khargone Temple: खरगोन के चोली गांव में स्थित ठाकुर श्री राधा विनोद बिहारीजी महाराज का 382 साल पुराना मंदिर, जिसमें भगवान श्री कृष्ण और ललिता देवी की पूजा होती है, यहां हर साल भव्य पाटोत्सव मनाया जाता है. इस सा…और पढ़ें

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ठाकुर

ठाकुर श्री राधा विनोद बिहारीजी महाराज मंदिर.

हाइलाइट्स

  • खरगोन के चोली गांव में 284 मंदिर हैं.
  • राधा-कृष्ण के साथ सखी ललिता देवी विराजित हैं.
  • 382 साल पुराना राधा विनोद बिहारीजी का मंदिर है.

खरगोन. मध्य प्रदेश के खरगोन का चोली गांव जिसे देवो की नगरी देवगढ़ और मिनी बंगाल भी कहा जाता है. यहां छोटे बड़े मिलाकर लगभग 284 मंदिर है. ठाकुर श्री राधा विनोद बिहारीजी महाराज का 382 साल पुराना मंदिर भी उन्हीं में से एक है. खास बात ये है कि, यहां भगवान श्रीकृष्ण अपनी प्रेमिका राधा और अष्ट सखियों में सबसे प्रिय सखी ललिता देवी के साथ विराजमान है. लोगों के मुताबिक, देश में कम ही ऐसे मंदिर है जहां ठाकुरजी के साथ ललिता देवी के दर्शन होते है.

मंदिर से जुड़े गौरव सिंह ठाकुर बताते है कि, ठाकुर श्री राधा विनोद बिहारीजी महाराज का मंदिर 1643 ईसवी से यहां मौजूद है. मंदिर काफी जीर्णशीर्ण हो चुका था. वृंदावन के सदगुरु बाबा श्री अलबेली शरण महाराज ने इस मंदिर का नवनिर्माण कराकर 3 फरवरी 2015 में पुनः प्रतिष्ठा कराई थी. तभी से हर साल गांव में भव्य पाटोत्सव मनाया जाता है. जिसमें वृंदावन, मथुरा के राष्ट्रीय संत शामिल होते है. इस साल यह महोत्सव 12 फरवरी से 19 फरवरी तक मनाया जाएगा. महोत्सव के दौरान पूरा गांव वृन्दावनमय हो जाता है.

बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर होती है पूजा
मंदिर के पुजारी संत श्री श्यामा सनंदी महाराज के अनुसार, वृंदावन के ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर यहां भी भगवान श्री कृष्ण की प्रतिदिन अष्टयाम सेवा होती है. यहां भगवान की बाल स्वरूप (लड्डू गोपाल) में पूजा होती है. आठ प्रहरों के मंगला, श्रृंगार, ग्वाल, राजभोग, उत्थापन, भोग, आरती और शयन होती है. साथ ही वृंदावन के स्वामी श्री हरदास जी महाराज की परंपरा के सभी आचार्योत्सव मनाएं जाते है. एक साल में लगभग 21 प्रमुख महोत्सव मनाते है. जिसमें वार्षिक पाटोत्सव सबसे बड़ा आयोजन है.

नौ दिन संतों का मिलेगा सानिध्य
माघ पूर्णिमा से शुरू होने वाले महोत्सव की शुरुआत 12 फरवरी को गोवत्स राधाकृष्ण जी महाराज (जोधपुर, राजस्थान) द्वारा पाटोत्सव एवं बधाई गायन के साथ हो चुकी है. 13 और 14 फरवरी को गोरेलाल कुंज श्रीधाम वृंदावन (मथुरा) के महंत 1008 स्वामी किशोरदास देवजु महाराज द्वारा सत्संग आशीर्वचन और फिर 15 से 18 फरवरी तक मलूक पीठाधीश्वर स्वामिश्री राजेन्द्र दास देवाचार्य जी महाराज द्वारा भक्तमाल कथा का आयोजन होगा. वहीं, 14 से 18 फरवरी तक राष्ट्रीय पुरस्कार सम्मानित पंडित राम शर्मा (वृंदावन) की रास मंडली द्वारा रासलीला का आयोजन भी होगा. 19 फरवरी को विशाल भंडारे के साथ महोत्सव का समापन किया जाएगा.

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कृष्ण के 8 सखियों में कौन थीं सबसे प्रिय? इस मंदिर में संग-संग हैं विराजमान!

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