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Sunderkand Ko Sundar Kyon Kehte Hain: सुंदरकांड को ‘सुंदर’ कहा जाना न सिर्फ इसकी कथात्मक सुंदरता के कारण है, बल्कि यह इस कांड के भीतर छिपे गहरे आध्यात्मिक और धार्मिक संदेश को भी दर्शाता है.
हाइलाइट्स
- सनातन धर्म में रामायण को महाकाव्य कहा जाता है.
- जिसमें भगवान राम के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों का उल्लेख किया गया है.
Sunderkand Ko Sundar Kyon Kehte Hain: सनातन धर्म में रामायण को महाकाव्य कहा जाता है. जिसमें भगवान राम के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों का उल्लेख किया गया है. रामायण के सात कांडों में से एक कांड है ‘सुंदरकांड’, जो न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके नामकरण के पीछे भी एक बड़ी ही रोचक कथा छिपी हुई है. यह कांड हनुमान जी के साहस, भक्ति और समर्पण की कहानी को दर्शाता है, जिससे यह विशेष रूप से आकर्षक और प्रेरणादायक बनता है. इसका नाम सुंदर कैसे पड़ा आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिष आचार्य पंडित योगेश चौरे से.
सुंदरकांड को ‘सुंदर’ क्यों कहा गया?
इस सवाल का जवाब जानना आपके लिए बहुत ही रोचक हो सकता है. दरअसल, ‘सुंदर’ शब्द का प्रयोग इस कांड में बार-बार किया गया है और इसका गहरा संबंध उस समय की घटनाओं से जुड़ा हुआ है, जब हनुमान जी ने लंका जाकर माता सीता से मिलने के बाद रावण के महल को जलाया. यह कांड न सिर्फ हनुमान जी के अद्वितीय साहस का प्रतीक है, बल्कि इसमें दिखाया गया है कि किस तरह सकारात्मकता और भक्ति से असंभव कार्य संभव हो सकते हैं.
रामायण के पांचवे कांड, यानी सुंदरकांड में हनुमान जी की लंका यात्रा का पूरी तरह से वर्णन किया गया है. इस यात्रा में उन्होंने न सिर्फ सीता जी का पता लगाया, बल्कि रावण के महल को भी जला दिया और यह संदेश दिया कि ईश्वर की शक्ति के आगे किसी भी शत्रु की ताकत टिक नहीं सकती. यही कारण है कि इस कांड को ‘सुंदर’ कहा गया है, क्योंकि इसमें सुंदरता की व्याख्या न सिर्फ दृश्य रूप में, बल्कि आंतरिक शुद्धता और साहस के रूप में भी की गई है.
‘सुंदरकांड’ का नामकरण पौराणिक घटनाओं पर आधारित है, जिनमें हनुमान जी की तरफ से लंका में राक्षसों को हराने, सीता माता को भगवान राम का संदेश देने और रावण के महल को जलाने जैसी वीरताएं शामिल हैं. इस कांड में हनुमान जी की भक्ति और उनकी शक्ति को पूरी तरह से प्रदर्शित किया गया है, जो इसे एक अद्वितीय स्थान प्रदान करता है.
इस कांड के माध्यम से यह संदेश भी मिलता है कि भगवान की भक्ति और निष्ठा से कोई भी कठिनाई पार की जा सकती है. इसी कारण सुंदरकांड का पाठ न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह मानसिक शांति और आत्मविश्वास का स्रोत भी बनता है. सुंदरकांड का नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है और मानसिक शांति बनी रहती है.
January 14, 2025, 19:04 IST
क्यों सुंदरकांड को कहते हैं ‘सुंदर’, कैसे पड़ा इसका नाम, बड़ी रोचक है कहानी

















