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खेरवाड़ा के बलीचा में आदिवासी परंपराओं संग अनूठी होली, तलवारों की गूंज और गैर डांस का उत्साह, देखने उमड़ी भीड़

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उदयपुर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र खेरवाड़ा के बलीचा गांव में होली के अगले दिन पारंपरिक रूप से विशाल आयोजन किया जाता है. यह आयोजन आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करता है.

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तलवारों

तलवारों की होली 

हाइलाइट्स

  • खेरवाड़ा में पारंपरिक गैर नृत्य और तलवार नृत्य का आयोजन.
  • हजारों की भीड़ ने दहकते कंडों पर दौड़ का आनंद लिया.
  • सुरक्षा के व्यापक इंतजाम, पुलिस बल तैनात.

खेरवाड़ा: उदयपुर जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र खेरवाड़ा के बलीचा गांव में होली के अगले दिन पारंपरिक रूप से विशाल आयोजन किया जाता है. इस आयोजन में हजारों की संख्या में वनवासी समाज के लोग जुटे और अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करते हैं. इस बार पारंपरिक गैर नृत्य, तलवार से होली के डांडे को काटने की रस्म और लोकगीतों की गूंज से पूरा क्षेत्र गुलजार हो उठा.

यह आयोजन सिर्फ बलीचा गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के गांवों के साथ-साथ डूंगरपुर, बांसवाड़ा और गुजरात व मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों से भी आदिवासी समुदाय के हजारों लोग पहुंचे. पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे युवा, महिलाएं और बुजुर्ग उत्साह के साथ इस आयोजन में शामिल हुए.

तलवार से डांडा काटने की परंपरा
यहां होली के डांडे को तलवार से काटने की अनूठी परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है. युवाओं की टोली आगे आकर इस परंपरा को निभाने का प्रयास करती है. जो युवा डांडा काटने में असफल होते हैं, उन्हें लोक देवता के मंदिर में सलाखों के पीछे कुछ समय के लिए प्रतीकात्मक रूप से बंद किया जाता है. भविष्य में इस कार्य को पूरा करने की इच्छा और संकल्प के साथ उन्हें रिहा किया जाता है.

गेर नृत्य और लोकगीतों की धूम
गांव के लोग ढोल की थाप पर पारंपरिक गैर नृत्य करते हुए होलिका दहन स्थल तक पहुंचे. होली जलने के बाद युवाओं ने दहकते कंडों के ऊपर दौड़ लगाई, जिसे देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी. इस दौरान तलवार और बंदूकों के साथ किए गए नृत्य ने आयोजन को और भी रोमांचक बना दिया.

सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम
इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे 9 खेरवाड़ा, पाटिया, पहाड़ा और बावलवाडा थाना क्षेत्र के पुलिस अधिकारी अपने दल-बल के साथ मौके पर तैनात रहे. अतिरिक्त पुलिस बल भी सुरक्षा को देखते हुए लगाया गया.

वनवासी संस्कृति की झलक
यह आयोजन आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करता है. पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा वनवासी समाज की वीरता, आस्था और उत्सवधर्मिता को दर्शाती है. इसमें शामिल होने वाले युवा और बुजुर्ग गर्व के साथ अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करते हैं, जिससे यह आयोजन हर साल और भव्य बनता जा रहा है.

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आदिवासी परंपराओं संग अनूठी होली, तलवारों की गूंज और गैर डांस का उत्साह

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