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गुढी पाडवा का महत्व! इस दिन राम लौटे, ब्रह्मा ने रचा युग और शुरू हुई पंचांग पूजन की परंपरा

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Gudi Padwa 2025: गुढी पाडवा हिंदू नव वर्ष की शुरुआत का पर्व है. इस दिन ब्रह्मा ने कृतयुग की स्थापना की और राम अयोध्या लौटे. इसे चैत्र शुद्ध प्रतिपदा भी कहते हैं. पंचांग पूजन और बड़ों का आशीर्वाद लेना महत्वपूर्ण…और पढ़ें

गुढी पाडवा के दिन राम लौटे, ब्रह्मा ने रचा युग और शुरू हुई पंचांग की परंपरा

गुढी पाडवा का महत्व

हाइलाइट्स

  • गुढी पाडवा हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है.
  • इस दिन ब्रह्मा ने कृतयुग की स्थापना की.
  • राम इस दिन वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे थे.

छत्रपति संभाजीनगर: अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी को नया साल शुरू होता है, लेकिन हिंदू धर्म में गुढी पाडवा के दिन नए साल की शुरुआत होती है. इस साल 30 मार्च को गुढी पाडवा है. गौरतलब है कि गुढी पाडवा के दिन हिंदू नया साल क्यों शुरू होता है? इसके पीछे कौन सी पौराणिक कथा है या गुढी पाडवा का क्या महत्व है? इस बारे में गुरुजी श्रीरामजी धानोरकर ने जानकारी दी है.

चैत्र शुद्ध प्रतिपदा भी कहा जाता है
Bharat.one से बात करते हुए पंडित श्रीरामजी धानोरकर ने बताया कि हमारी भारतीय सनातन पद्धति में गणना करने की एक पुरानी पद्धति है. इस पद्धति को पंचांग पद्धति कहा जाता है. इस पंचांग पद्धति की शुरुआत गुढी पाडवा से होती है. इसे चैत्र शुद्ध प्रतिपदा भी कहा जाता है.

कई ऐतिहासिक घटनाएं घटी हैं और उनका बहुत महत्व
बता दें कि इस दिन कई ऐतिहासिक घटनाएं घटी हैं और उनका बहुत महत्व भी है. ब्रह्मदेव ने कृतयुग की स्थापना इसी दिन की थी. साथ ही प्रभु राम इस दिन वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे थे. इसलिए इस दिन हम गुढी लगाते हैं, दरवाजे पर तोरण लगाते हैं और नया साल मनाते हैं.

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ब्राह्मणों से अच्छा आशीर्वाद लें
पंडित श्रीरामजी धानोरकर ने बताया कि इसके अलावा इस दिन आप गुढी की पूजा तो करें ही, साथ ही पंचांग की भी पूजा करें और ब्राह्मणों से अच्छा आशीर्वाद लें. साथ ही इस दिन आपका स्वास्थ्य अच्छा रहे इसके लिए आप नीम की पत्तियों और इमली-गुड़ का मिश्रण बनाकर सेवन करें, जिससे आपका स्वास्थ्य सालभर अच्छा रहेगा. इसलिए हम गुढी पाडवा के दिन नया हिंदू साल मनाते हैं. साथ ही सभी को इस दिन अपने बड़ों से भी आशीर्वाद लेना चाहिए और अपने नए साल की अच्छी शुरुआत करनी चाहिए.

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गुढी पाडवा के दिन राम लौटे, ब्रह्मा ने रचा युग और शुरू हुई पंचांग की परंपरा

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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