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चासनाला का प्राचीन कल्याणेश्वरी मंदिर, शक्ति उपासना का केंद्र, जहां भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी

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झरिया विधानसभा क्षेत्र के चासनाला में स्थित माँ कल्याणेश्वरी मंदिर शक्ति उपासना का एक प्राचीन और आस्था से भरा केंद्र है. यह मंदिर झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा के बिल्कुल निकट पर स्थित है. यह 500 से 850 वर्ष पुराना माना जाता है.

झरिया विधानसभा क्षेत्र के चासनाला में स्थित माँ कल्याणेश्वरी मंदिर शक्ति उपासना का एक प्राचीन और आस्था से भरा केंद्र है. दामोदर नदी के तट पर, झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा के बिल्कुल निकट स्थित यह मंदिर लगभग 500 से 850 वर्ष पुराना माना जाता है. यहाँ देवी माँ की पूजा करने पर हर मनोकामना पूरी होती है. भक्तों को शक्ति, साहस व समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

राजा परिवार ने करवाया था निर्माण
स्थानीय किंवदंतियों और इतिहास के अनुसार यह मंदिर प्राचीन काल में डोकरा कतरास और झरिया के राजपरिवार की पहल पर बनवाया गया था. देवी माँ का स्वरूप काली के रूप में स्थापित किया गया था.  आज तक यहं राजसी परंपराओं के साथ पूजा-अर्चना जारी है. मंदिर में मौजूद वर्तमान पुजारियों के पूर्वजों को भी राजपरिवार ने ही यहाँ रहने व पूजा करने की जिम्मेदारी सौंपी थी और पूजा स्थल के लिए जमीन दान में दी थी.पुजारियों के अनुसार मंदिर का इतिहास लगभग 800 वर्षों से भी पुराना है और यह क्षेत्र शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है.

रोज होती है बाली
इस मंदिर की विशिष्ट परंपराओं में से एक है. प्रतिदिन एक ब​ली देने की परंपरा. मान्यता है कि माता हर दिन एक ब​ली स्वीकार करती हैं और उस ब​ली के प्रसाद को भक्त अत्यंत श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं. यह परंपरा यहाँ की आस्था और निष्ठा को आज भी जीवित रखे हुए है.

दो एकड़ क्षेत्र में फैला भव्य प्रांग
मंदिर परिसर लगभग दो एकड़ क्षेत्र में फैला है. यहां शादी-विवाह भी धूमधाम से संपन्न होते हैं. खुले वातावरण हरियाली और शांत आस्था से भरी जगह परिवारों के लिए एक आदर्श धार्मिक स्थल बनाती है. बच्चों के खेलने के लिए भी यहाँ पर्याप्त जगह है. जिसके चलते लोग पारिवारिक रूप से यहाँ समय बिताना पसंद करते हैं.

विशेष आकर्षण रेवाड़ी पेड़ पर मनोकामना बांधना
मंदिर की एक अनोखी मान्यता लोगों को अत्यधिक आकर्षित करती है. मंदिर परिसर में स्थित रेवाड़ी का पेड़ मनोकामना पूर्ति का प्रतीक माना जाता है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यदि कोई भक्त अपनी इच्छा के साथ चुनरी फूल या पत्थर इस पेड़ पर बांधता है और उसकी इच्छा पूरी हो जाती है, तो वह वस्तु स्वयं पेड़ से गिरकर पास स्थित कुएं में चली जाती है.

त्योहार व नववर्ष पर लगता है विशाल मेला
दीवाली की अमावस्या की रात को यहाँ विशेष पूजा-अर्चना की जाती है जिस दौरान हजारों भक्त माता के दर्शन के लिए पहुँचते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस रात माँ कल्याणेश्वरी अपनी कृपा दृष्टि सभी भक्तों पर बरसाती हैं.नव वर्ष के अवसर पर यह स्थान धार्मिक उत्सव के साथ-साथ पिकनिक स्पॉट के रूप में भी प्रसिद्ध है. झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार और बंगाल के हजारों लोग यहाँ परिवार सहित पहुँचते हैं. हर वर्ष 10 हजार से अधिक लोग नए वर्ष की शुरुआत माँ के दर्शन के साथ करते हैं.

श्रद्धा का अटूट केंद्र
चासनाला का कल्याणेश्वरी मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है. बल्कि यह लोगों की भावनाओं विश्वास और संस्कृति का प्रमुख प्रतीक भी है. यहाँ की आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक शांति हर आगंतुक को अपने प्रति खींच लाती है.

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चासनाला का प्राचीन कल्याणेश्वरी मंदिर, शक्ति उपासना का केंद्र, जानें मान्यता

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