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जितिया व्रत मिथिलांचल में मछली और साग के साथ क्यों मनाया जाता है.

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Jitiya Vrat 2025: मिथिलांचल का जितिया व्रत महापर्व है. जिसमें महिलाएं मछली और विशिष्ट सागों का सेवन करती हैं. यह पुत्र की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है.

दरभंगा: मिथिलांचल का प्रसिद्ध पर्व जितिया काफी चर्चित है. इसे महापर्व नाम से संबोधित किया जाता है क्योंकि यह सबसे कठिन पर्व माना जाता है. इस पर्व में जल ग्रहण करने से भी व्रत भंग हो जाता है, ऐसी मान्यता है. लेकिन इस पर्व को करने से पहले महिलाएं मछली का सेवन करती हैं, जो अपने आप में अनोखा है. आइए जानते हैं इसके पीछे का रहस्य और क्या कहता है शास्त्र.

इसलिए कहा जाता है महा जितिया व्रत
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.कुणाल कुमार झा बताते हैं कि यह व्रत ‘महा’ शब्द के साथ जुड़ा होता है. इसलिए इसे महा जितिया व्रत कहा जाता है. इस पर्व में व्रत करने से पहले अनेक विधान होते हैं. जिस प्रकार अन्य व्रतों में अभक्ष्य पदार्थों का त्याग किया जाता है, जैसे लहसुन, प्याज, मरूवा, साग इत्यादि, लेकिन जितिया व्रत में खासकर मछली का विधान है. इसके साथ मरूआ का भी विधान है, जिसे मछली के साथ ग्रहण करते हैं. इसके बाद नोनी का साग और कर्मी का साग, जिसे मछली के समतुल्य माना गया है. उसका सेवन करके यह व्रत किया जाता है.

शाकाहारी लोगों के लिए विशेष व्यवस्था
जो शाकाहारी लोग होते हैं, उनके लिए कर्मी का साग और नोनी का साग जिसे मछली के समतुल्य माना गया है. उसका सेवन किया जाता है. यह इसलिए किया जाता है ताकि जितने भी अशुभत्व जन्य दोष हैं, जो संतान के पक्ष में और परिवार में, हमारे कुल में हैं. उन अशुभत्व जन्य दोषों को समाप्त करने के लिए महिला जो व्रत करती है, वह अपने ऊपर ले लेती है.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह माना जा सकता है कि इस प्रक्रिया से निगेटिविटी एनर्जी को समाप्त करने के लिए अपने ऊपर लिया जाता है. व्रत के बाद रात्रि के अंत में उठगन किया जाता है और फिर निर्जला व्रत रखा जाता है.
जितिया व्रत का महत्वयह व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए विशेष प्रखर माना जाता है. या जिसे पुत्र की प्राप्ति हो गई होती है, वह अपने पुत्र की लंबी आयु के लिए इस व्रत को धारण करती है. मिथिलांचल में यह व्रत अत्यंत श्रद्धा और निष्ठा से किया जाता है.

करतीं हैं ये कामना
मिथिलांचल की परंपरा मिथिलांचल में जितिया पर्व एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक अवसर है. यहां की महिलाएं इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से करती हैं. अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र की कामना करती हैं. जितिया व्रत मिथिलांचल की एक अनोखी और महत्वपूर्ण परंपरा है, जिसमें मछली और विशिष्ट सागों का सेवन करने का विशेष विधान है. यह व्रत न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसमें सांस्कृतिक और पारंपरिक पहलू भी हैं जो इसे और भी विशेष बनाते हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और Bharat.one तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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