Home Uncategorized झंडे जी मेले का दर्शनी गिलाफ, 100 सालों बाद पूरी होती है...

झंडे जी मेले का दर्शनी गिलाफ, 100 सालों बाद पूरी होती है दादा-परदादा की इच्छा, जानें क्या है मान्यता!

0
6


Last Updated:

देहरादून में 19 मार्च से झंडे जी के मेले की शुरुआत होगी, जो श्री गुरु राम राय जी के जन्मदिन पर आयोजित होता है. इस मेले में झंडारोहण और गिलाफ चढ़ाने की परंपरा है.

X

झंडे

झंडे जी के दर्शनी गिलाफ को चढ़ाने के लिए 100 साल का इंतजार करती है संगत

हाइलाइट्स

  • देहरादून में 19 मार्च से झंडे जी का मेला शुरू होगा.
  • दर्शनी गिलाफ की बुकिंग 100 साल तक की होती है.
  • झंडे जी का मेला प्रेम, सद्भावना और आस्था का प्रतीक है.

देहरादून: राजधानी देहरादून में 19 मार्च से झंडे जी के मेले की शुरुआत होने जा रही है, जो होली के पांचवें दिन से शुरू होता है. यह मेला सिखों के सातवें गुरु श्री गुरु हर राय जी के बड़े बेटे, श्री गुरु राम राय जी के जन्मदिन के मौके पर आयोजित होता है. श्री गुरु राम राय जी का जन्म 1646 में चैत्रवदी पंचमी को हुआ था. साल 1676 में वे दून घाटी में आए थे और गढ़वाल के राजा फतेहशाह ने उन्हें तीन गांव, खुदबुड़ा, राजपुर और चामासारी दान किए थे. उनके पोते प्रदीप शाह ने भी कई अन्य गांवों का दान किया था. तभी से यह परंपरा चली आ रही है, और इस अवसर पर हर साल झंडारोहण किया जाता है, जिसपर गिलाफ चढ़ाए जाते हैं, जिन्हें विशेष मान्यता प्राप्त है.

झंडा जी के मेला का महत्व
झंडे जी का मेला लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है, और हर साल दूर-दूर से लोग इस मेले में शामिल होने के लिए आते हैं. श्री दरबार साहिब के मुख्य व्यवस्थापक, मधुसूदन सेमवाल ने Bharat.one को बताया कि झंडे जी के ध्वजदंड की लंबाई 86 फीट और मोटाई 30 इंच है. परंपरा के अनुसार, झंडे जी में तीन प्रकार के गिलाफ चढ़ाए जाते हैं. सबसे पहले, सादा (सफेद) गिलाफ होते हैं, जिन्हें अनगिनत संगत द्वारा चढ़ाया जाता है और बुकिंग जारी रहती है. फिर शनील गिलाफ आते हैं, जिनकी संख्या सीमित होती है और बुकिंग 20 से 50 तक होती है. इन गिलाफ को चढ़ाने के लिए श्री दरबार जी महाराज में सालों का इंतजार करना पड़ता है. सबसे ऊपर, दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाता है, जो केवल एक ही होता है. इसे चढ़ाने के लिए कम से कम 100 साल का इंतजार करना पड़ता है. इस बार 111 साल बाद पंजाब के दो भाइयों, सतनाम सिंह और राजेंद्र पाल सिंह को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का मौका मिलेगा. जिसकी बुकिंग उनके दादा ने 111 साल पहले की थी.

दर्शनी गिलाफ की बुकिंग और परंपरा
मधुसूदन सेमवाल ने यह भी बताया कि श्री दरबार साहिब में 13 फरवरी 2025 को दर्शनी गिलाफ के लिए आखिरी बुकिंग हुई थी. वहीं, 24 फरवरी 2025 को शनील गिलाफ की आखिरी बुकिंग हुई थी. इस वर्ष दर्शनी गिलाफ के लिए 2136 तक की बुकिंग हो चुकी है, जिसका नंबर 111 साल बाद आएगा. शनील गिलाफ के लिए 2050 तक बुकिंग हो चुकी है, जिसके बाद 25 सालों तक संगत को गिलाफ चढ़ाने का मौका मिलेगा. यह परंपरा दादा-परदादा की इच्छाओं को पूरा करने का एक माध्यम मानी जाती है.

प्रेम, सद्भावना और आस्था का प्रतीक
इस परंपरा की खासियत यह है कि यह प्रेम, सद्भावना और आस्था का प्रतीक मानी जाती है. झंडे जी का आरोहण इस बार 19 मार्च को होगा, और इसके साथ मेला भी शुरू हो जाएगा, जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है.

homedharm

झंडे जी मेले का दर्शनी गिलाफ, 100 सालों बाद पूरी होती है दादा-परदादा की इच्छा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here