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तीन दिनों के लिए देवघर के लोग हो जाएंगे लॉक, चौंकाने वाली है वजह

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Deoghar Gangwali Puja: देवघर में हर साल चैत्र माह में ‘गँवाली पूजा’ होती है, जिसके दौरान पूरा शहर तीन दिनों तक लॉक रहता है. इस परंपरा की जड़ें पुराने समय में फैली महामारी से जुड़ी हैं, जिसे रोकने के लिए मां काल…और पढ़ें

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25 मार्च को देवघर बैद्यनाथ मंदिर परिसर में मनाया जाएगा गँवाली पूजा.

हाइलाइट्स

  • गँवाली पूजा के दौरान देवघर तीन दिनों तक बंद रहेगा.
  • पूजा 25 मार्च 2025 को होगी, तैयारियां 23 मार्च से शुरू होंगी.
  • पूजा के दौरान नगरवासी शहर से बाहर नहीं जा सकते.

परमजीत /देवघर: झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम में कई अनोखी परंपराएं निभाई जाती हैं, लेकिन गँवाली पूजा सबसे खास है. यह तीन दिनों तक पूरे शहर को बंद कर देने वाली परंपरा है. 2025 में यह पूजा 25 मार्च को होगी, लेकिन इसकी तैयारियां 23 मार्च से ही शुरू हो जाएंगी.

गँवाली पूजा
बैद्यनाथ मंदिर परिसर में स्थित मां काली मंदिर में हर साल चैत्र माह में गँवाली पूजा होती है. इस पूजा के दौरान तीन दिनों तक पूरा शहर मंत्रों के उच्चारण के साथ ‘बांध’ दिया जाता है. इस दौरान नगरवासी शहर से बाहर नहीं जा सकते, क्योंकि इसे अपशकुन माना जाता है. यह पूजा नगर कल्याण और रोग-निवारण के लिए की जाती है.

कैसे हुई इस पूजा की शुरुआत?
मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थ पुरोहित लंबोदर मिश्रा के अनुसार, प्राचीन काल में चैत्र माह के दौरान चेचक, खसरा और जानलेवा बुखार जैसी बीमारियां फैलीं.पूरे गांव में महामारी से कई लोग मारे गए. तब पंडा समाज ने मिलकर मां काली की विधिवत पूजा की और इसके बाद रोगों का प्रकोप कम हो गया.तभी से हर साल नगर कल्याण के लिए गँवाली पूजा की परंपरा चली आ रही है.

शोभायात्रा और हवन का महत्व
पूजा के दिन पूरे नगर में शोभायात्रा निकाली जाती है.
कुंवारी कन्याओं को भोजन कराया जाता है और मंदिर परिसर में विशेष हवन होता है. ऐसा माना जाता है कि हवन का धुआं शरीर में प्रवेश करते ही बीमारियों का नाश करता है. पूजा समाप्त होते ही शहर को बंधन मुक्त कर दिया जाता है.

देवघर क्यों बनता है ‘लॉक’ शहर?
23 मार्च से पूरे शहर में विशेष मंत्रोच्चारण कर ‘बांध’ लगाया जाएगा.
तीन दिन तक कोई भी व्यक्ति शहर से बाहर नहीं जा सकता.
25 मार्च को पूजा संपन्न होने के बाद नगर का बंधन हटा दिया जाता है.
यह परंपरा आस्था, परंपरा और चिकित्सा विश्वास का अनोखा संगम है, जो देवघर को एक अलग पहचान देती है.

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