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त्रेता युग के इस मंदिर में करें पूजा, जिंदगी के सारे दुख हो जाएंगे दूर, भगवान राम से है जुड़ा

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Dukhharan Nath Mandir Gonda: यूपी में बहुत सारे मंदिर हैं. कुछ मंदिर तो ऐसे हैं, जिन्हें लोग चमत्कारी बताते हैं. दुखहरण नाथ मंदिर भी बहुत प्रसिद्ध है. दूर-दूर से लोग इस मंदिर में आते हैं. पर शायद ही किसी को इस मंदिर के नाम के पीछे की कहानी पता हो. नाम के पीछे भगवान राम और शिव की कहानी है. आइए जानते हैं महंत ने मंदिर के बारे में क्या बताया.

दुखहरण नाथ मंदिर
Bharat.one से बातचीत के दौरान मंदिर के महंत रुद्र नारायण गिरी ने बताया कि गोंडा नगर के मध्य स्थित दुखहरण नाथ मंदिर का अतीत त्रेता युग से जुड़ा है. मान्यता है कि अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्म पर भगवान भोलेनाथ कैलाश पर्वत से दर्शन करने गए हुए थे. वहां से वापस आते समय वह काफी खुश थे. ऐसे में वह जिस स्थल पर ठहरे थे, उसे वर्तमान में दुखहरण नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है.

कब-कब लगता है यहां पर मेला
सावन के महीने में यहां पर पूजा अर्चना का विशेष महत्व है. इसके अलावा यहां पर कजरी तीज पर सरयू नदी से जल लेकर लाखों कांवरिया दुखहरनाथ का जलाभिषेक करते हैं. इससे उनकी सारी मनोकामना पूरी होती है.

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सुबह से ही शुरू हो जाता है जलाभिषेक
वैसे तो यहां पर हर सोमवार और शुक्रवार को को श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. लेकिन सावन माह में यहां पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग जाता है. यहां पर भक्त रुद्राभिषेक भी करते हैं।.

क्या है इस मंदिर के नाम की कहानी
लोगों का कहना है कि जब भगवान राम का जन्म हुआ था, तो भगवान भोलेनाथ उनका दर्शन पाने के लिए अयोध्या आए थे. उसके बाद वह वापस आकर यहीं पर विश्राम करने लगे थे. अयोध्या से वापस आने के बाद भगवान राम कही रो रहे थे. भगवान शिव ने दोबारा जाकर उनका दर्शन दिया तो राम भगवान खुश हो गए इसलिए इस स्थान का नाम दुख हरण नाथ पड़ गया.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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