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दशहरे के दिन अगर न दिखे नीलकंठ पक्षी तो घर ले आएं ये फूल, साल भर बनी रहेगी सुख-समृद्धि

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देवघर: विजयादशमी की तिथि बेहद खास मानी जाती है, क्योंकि इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था. वहीं, यह भी मान्यता है कि विजयादशमी के दिन ही माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था. सनातन धर्म में मान्यता है कि अगर विजयादशमी या दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाएं, तो इसके शुभ परिणाम मिलते हैं. लेकिन, अब प्रकृति में नीलकंठ पक्षियों की संख्या कम हो गई है. खासकर दशहरे के दिन इनका दिखना तो दुर्लभ है. ऐसे में एक और उपाय है, जिससे आप अपने दशहरे को अति शुभ कर सकते हैं.

देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने Bharat.one को बताया कि दशहरा का दिन बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक माना जाता है. इस साल दशहरा 12 अक्टूबर को है. दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. मान्यता है कि भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले इसी पक्षी का दर्शन किए थे. इस पक्षी के दर्शन करने से सालों भर जातक अपने शत्रु पर विजय प्राप्त करेगा. साथ ही हर बिगड़े कार्य पुरे होंगे. इसलिए दशहरे की सुबह अगर नीलकंठ दिख जाए तो इसे प्रभु की कृपा समझें.

न हो नीलकंठ पक्षी के दर्शन तो घर लें आएं ये फूल
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि विजयादशमी या दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है. लेकिन, अगर आपको कहीं भी नीलकंठ पक्षी दिखाई न दे तो किसी भी दुर्गा मंदिर में जाकर अपराजिता का सफेद पुष्प दाहिने हाथ में बांध लें या घर ले आएं. सफेद अपराजिता का पुष्प माता दुर्गा को बेहद प्रिय है और माता दुर्गा का एक नाम अपराजिता भी है. इसका अर्थ होता है कभी भी पराजित न होना. इसलिए दशहरा के दिन अपराजिता का सफेद पुष्प अवश्य घर लाएं. इससे सालों भर घर में सुख समृद्धि बनी रहेगी.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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