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दिवाली की रात तांत्रिक क्यों करते हैं शमशान में तंत्र-मंत्रों की सिद्धि? अयोध्या के विद्वान से जानें सब

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अयोध्या: दीपावली ऐसा त्‍योहार है जिसका सभी को पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता है. दीपावली पूरे 5 दिन का उत्‍सव है जो कि धनतेरस से लेकर भाई दूज तक मनाया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि के दिन दीपावली का पर्व मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन लंका विजय कर प्रभु राम 14 वर्ष की वनवास काल के बाद अयोध्या लौटे थे तब अयोध्या वासियों ने दीप माला जलाकर अमावस्या की रात्रि प्रभु राम का स्वागत किया था. कार्तिक अमावस्या की रात जहां एक तरफ लोग भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा आराधना करते हैं तो वहीं दूसरी तरफ इस दिन तांत्रिक लोग देर रात्रि शमशान घाट पर जाकर तंत्र-मंत्र की साधना में भी लीन रहते हैं. तंत्र विद्या सीखने वाले तांत्रिक इस दिन का बेसब्री से इंतजार भी करते हैं.

दरअसल हिंदू धर्म में कई तरह के ज्ञान और कल का प्रचलन है. इन्ही में से एक है तांत्रिक विद्या, जिसे काला जादू के नाम से भी जानते हैं. हालांकि इसका सनातन धर्म से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि तंत्र विद्या का प्रयोग किसी कार्य में जल्दी सफलता पाने या किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है. तांत्रिक दिवाली की रात अपने तंत्र-मंत्र की साधना करते हैं .अक्सर आपने देखा या सुना होगा कि टोने और टोटके यानी तंत्र विद्या की सिद्धि दिवाली, गुप्त नवरात्रि या किसी शुभ मुहूर्त की रात्रि में किया जाता है.

क्यों करते हैं तंत्र-मंत्रों की सिद्धि ?
अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि कार्तिक अमावस्या की रात्रि में तांत्रिक शमशान घाट में तंत्र-मंत्र की सिद्धि करते हैं. इस दिन लोग शत्रुओं पर विजय पाने, गृह शांति के लिए और लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के टोने टोटके करते हैं. तंत्र विद्याके अनुसार दिवाली की रात्रि पर कई अद्भुद शक्तियों की सिद्धि की जाती है.किंतु हमें तंत्र-मंत्र और टोटके की सिद्धि करते समय ये अवश्य ध्यान रखना चाहिए की सदैव हम उन्ही मंत्रो का आश्रय लें जो कल्याणकारी और हितकारी हो. किसी को क्षति पहुंचाने के लिए किए गए टोटके और मंत्र सिद्ध हो जाते हैं किंतु वो हमारा और हमारी आने वाली पीढ़ी के समस्त सुख को नष्ट कर देते हैं. इसका दुष्परिणाम हमारी भावी पीढ़ी को भोगना पड़ता है.

भूलकर भी न करें ये काम
पंडित कल्कि राम बताते हैं कि भगवती मां सरस्वती सौम्यता और प्रेम का प्रतीक हैं. यह सदैव मानव का कल्याण करती हैं. इसलिए अमावस्या की इस रात्रि सदुपयोग करना चाहिए. हमें सनातन धर्म में वर्णित दिव्य अमोघ मंत्रो की सिद्धि और टोटकों का सिद्ध करना चाहिए. अपने निजी स्वार्थ के चलते दूसरे का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. तंत्र शास्त्र के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात्रि पर कई अद्भुद शक्तियों की सिद्धि की जाती है. हालांकि इस साधना के दौरान यदि भूल वश भी किसी का अहित नहीं करना चाहिए इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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