Home Uncategorized नासिक में बना गोमाय हनुमान मंदिर है बेहद खास, जानें इसका इतिहास

नासिक में बना गोमाय हनुमान मंदिर है बेहद खास, जानें इसका इतिहास

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नासिक: महाराष्ट्र में हजारों मंदिर हैं. हर मंदिर का अपना एक अलग इतिहास होता है. इस मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा है. आज हम नासिक के एक ऐसे ही मंदिर की कहानी जानने जा रहे हैं, जिसकी स्थापना समर्थ रामदास स्वामी ने की थी.

समर्थ रामदास स्वामी
समर्थ रामदास स्वामी का पहले नाम नारायण तोसर था. बारह वर्ष की आयु में, वह जालना जिले के जाम्ब गाँव में अपने विवाह के तम्बू से भाग गए और एक नदी के किनारे नासिक के पास ताकली गाँव में पहुँचे. उन्होंने अपने जीवन की सबसे लंबी अवधि, 12 वर्ष, ताकली गाँव में बिताई. नारायण तोसर को लोग मठ में समर्थ रामदास स्वामी के रूप में जानने लगेइसी संबंध में यह समीक्षा की गयी है.

समर्थ रामदास स्वामी की कहानी
वे प्रतिदिन प्रातः गोदावरी और नन्दिनी के सम्मुख संगम पर जल में खड़े होकर रामनाम का जाप करते थे. उस समय के शिष्यों में सबसे छोटे बालक उद्धवस्वामी भी उनके शिष्य बन गये. समर्थ ने बारह वर्ष तक रामनाम का जप किया. लेकिन उसके बाद जब उन्होंने शिष्यों से कहा कि मैं अब देश भ्रमण पर जाऊंगा तो सभी शिष्यों को दुख हुआ. इसमें उद्धवस्वामी ने समर्थ के पैरों को गले लगाते हुए कहा, ‘मुझे मत छोड़ो, आप मेरे माता-पिता और अभिभावक हैं, मैं किसकी तरफ देखूंगा.’

कैसे स्थापित हुआ गोमाय हनुमान मंदिर
इस पर समर्थ ने अपने हाथों से गाय के गोबर और मिट्टी के मिश्रण से इस स्थान पर हनुमान की मूर्ति स्थापित की. ‘यह मूर्ति अब आपकी प्रतिद्वंद्वी होगी, आपको इस मूर्ति की पूजा करनी चाहिए’, यह कहकर वे तीर्थयात्रा पर निकल पड़े. यह स्थान अब नासिक के प्रसिद्ध तकली हनुमान मंदिर और समर्थ रामदास स्वामी के पहले मठ के रूप में प्रसिद्ध है.

समर्थ रामदास ने 13 करोड़ राम नाम का जाप किया
इस मारुति को समर्थ द्वारा स्थापित 11 मारुति में नहीं गिना जाता है. हालाँकि, समर्थ द्वारा स्थापित हनुमान की पहली मूर्ति होने के कारण वहाँ हमेशा भक्तों की भीड़ लगी रहती है. टाकली गांव अब नासिक महानगर का हिस्सा है. इस मारुति की शक्ति से निर्मित गोमाया मारुति एक ऐसा स्थान है जहां भक्त आते हैं और मारुति की पूजा करते हैं. मारुति निश्चित रूप से अपने आदर्श की इच्छा पूरी करते हैं. इस स्थान पर समर्थ रामदास ने 13 करोड़ राम नाम का जाप किया और उसके बाद उन्होंने 12 वर्षों तक गायत्री का आशीर्वाद दिया और कहा जाता है कि इस मारुति में समर्थ की पूर्ण शक्ति थी.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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