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पितरों को करना है खुश या दिलाना मोक्ष, जरूर करें यह व्रत, पंडित जी से जानें पूजन विधि, घर में आएगी सुख-समृद्धि

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इस समय पितृ पक्ष चल रहा है, इसे श्राद्ध पक्ष भी कहते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में पितर धरती पर आते हैं. वे अपनी संतान से उम्मीद करते हैं कि वे उनको तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, दान आदि से संतुष्ट करेंगे. जब वे तृप्त होते हैं तो खुश होकर आशीर्वाद देते हैं, जिससे घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है. परिजन निरोगी रहते हैं और उनके साथ पूरे परिवार की उन्नति होती है. यदि आपके पितर नाराज हैं या आप उनको ​मोक्ष दिलाना चाहते हैं तो आपको अश्विन कृष्ण एकादशी के दिन इंदिरा एकादशी का व्रत रखना चाहिए. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं इंदिरा एकादशी का व्रत की विधि क्या है, ताकि पितरों को खुश कर सकें और उनको मोक्ष दिला सकें.

इंदिरा एकादशी 2024 मुहूर्त
इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 28 सितंबर दिन शनिवार को है.
अश्विन कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ: 27 सितंबर, दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से
अश्विन कृष्ण एकादशी तिथि का समापन: 28 सितंबर, दोपहर 2 बजकर 49 मिनट पर
पूजा का मुहूर्त: सुबह में 06:13 बजे से
इंदिरा एकादशी व्रत पारण: 29 सितंबर, रविवार, सुबह 6:13 बजे से 8:36 बजे तक

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इंदिरा एकादशी व्रत और पूजा विधि
1. पितरों को प्रसन्न करने और मोक्ष दिलाने के लिए 27 सितंबर से सात्विक भोजन करें. दिन में नदी स्नान के बाद पितरों का विधि विधान से श्राद्ध करें और एक बार भोजन करें. फिर व्रत के दिन 28 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक ​क्रियाओं से मुक्त होकर स्नान करें. उसके बाद साफ वस्त्र पहनें. फिर हाथ में जल लेकर इंदिरा एकादशी व्रत और पूजा का संकल्प करें.

2. अब आप शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा करें. श्रीहरि का गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं. उसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल, अक्षत्, दूध, दही, शहद, हल्दी, तुलसी के पत्ते, घी, नैवेद्य आदि अर्पित करते हुए पूजा करें.

3. पूजा के समय विष्णु सहस्रनाम और इंदिरा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें. उसके बाद आरती करें. दिनभर फलाहार पर रहें और रा​त के समय में भगवत जागरण करें. अगले दिन पारण के से पूर्व स्नान, पूजा आदि कर लें.

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4. उसके बाद ब्राह्मणों को अन्न, फल, वस्त्र आदि का दान दें. फिर आप भगवान विष्णु का स्मरण करें. उनसे प्रार्थना करें कि इस व्रत से जो भी पुण्य अर्जित हुआ है, उसे मेरे पितरों को प्रदान करें ता​कि उनको मोक्ष की प्राप्ति हो. जिस प्रकार से राजा इंद्रसेन ने इस व्रत के पुण्य से अपने पिता को स्वर्ग लोक भेजने में सफल रहे, उसी प्रकार मेरे पितर भी स्वर्ग प्राप्त करें और उनको कष्टों से मुक्ति मिले.

5. इसके बाद आप पारण करके व्रत को पूरा करें. इस व्रत को विधि पूर्वक करने वाला व्यक्ति भी जीवन के अंत में भगवान विष्णु के श्रीचरणों में स्थान पाता है.

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