देवघर: पितृपक्ष चल रहे हैं. इस दौरान पूरे देश में लोग अपने पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं. कोई पिंडदान कर रहा है तो कोई नियमित तर्पण विधि कर रहा है. हालांकि, ये विधियां पितरों के निमित्त की जाती हैं. लेकिन, तब क्या करें जब पितृपक्ष के दौरान परिवार के किसी सदस्य या रिश्तेदार की मृत्यु या अकाल मृत्यु हो जाए? क्या ऐसी स्थिति के लिए भी शास्त्रों में कुछ नियम हैं. आइए देवघर के ज्योतिषाचार्य से इव विषय पर जानते हैं.
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने Bharat.one को बताया कि 17 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है, जो पितृ अमावस्या यानी 2 अक्टूबर तक चलता रहेगा. आगे बताया कि मृत्यु दो प्रकार की होती है. एक अकाल मृत्यु और एक सामान्य मृत्यु. जिसकी आयु पूर्ण हो चुकी है, अगर पितृपक्ष में उसकी मृत्यु होती है तो यह बेहद शुभ माना जाता है. ऐसे व्यक्ति की आत्मा देव तुल्य हो जाती है. उनका घर में ही श्राद्ध, पिंडदान करने से परिवार को आशीर्वाद प्राप्त होता है. लेकिन, पितृपक्ष में किसी की अकाल मृत्यु हो तो विधान में बदलाव करना होता है.
पितृपक्ष में अकाल मृत्यु हो तो ये करें
आमतौर पर पितृपक्ष में किसी बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो इसे बेहद शुभ माना जाता है और अंतिम संस्कार के विधि-विधान में कोई बदलाव नहीं होता. माना जाता है कि ऐसा व्यक्ति सद्गति को प्राप्त होता है. लेकिन, पितृपक्ष में किसी की अकाल मृत्यु हो जाए जैसे सड़क दुर्घटना, आत्महत्या या किसी दूसरे कारण से तो ऐसी स्थिति में घर पर श्राद्ध, तर्पण बिल्कुल नहीं करना चाहिए. ऐसे पितृ का पिंडदान बिहार के गया जाकर विष्णुपद मंदिर में करना चाहिए. वहीं, तर्पण और श्राद्ध फल्गु नदी के किनारे करना चाहिए. इससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है.
FIRST PUBLISHED : September 21, 2024, 16:30 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

















