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पूजा से शादी तक! महिलाओं का है ये श्रृंगार, आखिर क्यों महिलाएं पैरों में लगाती हैं आलता? जानें धार्मिक महत्व

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Reason for Applying Alta: महिलाओं के सोहल श्रृंगार का हिस्सा आलता बहुत ही खास होता है. महिलाएं हर एक शुभ कार्य पर इसे अपने पैरों में लगाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं, इसके धार्मिक महत्व.

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पूजा शादी और त्योहार पर महिलाएं क्यों लगाती हैं पैरों में महावर कब नहीं लगाना है

हाइलाइट्स

  • महावर को सोलह श्रृंगार का हिस्सा माना जाता है.
  • महावर लगाने से महिलाओं का सौभाग्य बढ़ता है.
  • मंगलवार और दक्षिण दिशा में महावर नहीं लगाना चाहिए.

रीवा. आपने महिलाओं को विशेष अवसरों जैसे पूजा, त्योहार और शादी पर अपने पैरों में महावर लगाते हुए देखा होगा. हालांकि बहुत से लोगों ने इसे देखा है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि महिलाओं द्वारा महावर लगाने के पीछे क्या अर्थ और महत्व है. महावर को आलता के नाम से भी जाना जाता है और आइए जानें कि महिलाएं अपने पैरों में महावर क्यों लगाती हैं और इसका क्या महत्व है.

विंध्य क्षेत्र में किसी खास अवसर पर महिलाओं द्वारा महावर लगाना शुभता का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि समूचे विंध्य क्षेत्र की जगहों पर दुल्हन का श्रृंगार आलता के बिना अधूरा माना जाता है. आइए जानते हैं पंडित विनेश कुमार शास्त्री से कि महिलाएं खास मौकों पर अपने पैरों पर आलता क्यों लगाती हैं और कब नहीं लगाना चाहिए.

महावर को सोलह श्रृंगार का हिस्सा माना जाता है, इसलिए शादीशुदा महिलाओं के लिए महावर लगाना ज़रूरी होता है. कहा जाता है कि महावर लगाने से महिलाओं का सौभाग्य बढ़ता है. सुहागिनों और लड़कियों को भी महावर लगाया जाता है. आलता लगाना बहुत शुभ माना जाता है और इसके बिना श्रृंगार भी अधूरा माना जाता है.

सोलह श्रृंगार का खास हिस्सा है महावर
महावर को सोलह श्रृंगार का हिस्सा माना जाता है. सुहागन महिलाओं के लिए महावर लगाना जरूरी होता है. सौभाग्य में वृद्धि के लिए होने वाली दुल्हन और कन्याओं को भी आलता लगाया जाता है. आलता लगाना काफी शुभ माना जाता है और इसके बिना श्रृंगार भी अधूरा माना जाता है. इसी वजह से बहुत सारे राज्यों में शुभ कार्यों के दौरान महावर लगाना जरूरी माना जाता है.

कन्याओं को भी लगाया जाता है महावर
महावर को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है. इसी वजह से नवजात बच्चियों और कुंवारी कन्याओं के पैरों में भी महावर लगाना शुभ होता है. कई जगहों पर बेटी के जन्म के बाद गृह प्रवेश के समय और नवरात्रि पूजन के दौरान कुंवारी कन्याओं के पैरों में महावर लगाकर, घर में इसकी छाप भी ली जाती है. जिससे घर सुख सम्पन्नता से भरपूर रहे.

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नहीं लगाना चाहिए महावर
बहुत से महिलाएं शुभ कार्य में महावर लगाना तो जरूरी समझती हैं, लेकिन किसी भी दिशा में बैठकर इसको अप्लाई कर लेती हैं. जबकि मान्यता के अनुसार महावर को कभी भी दक्षिण दिशा में मुख करके नहीं लगाना चाहिए. इसलिए आलता लगाते समय दिशा का ध्यान जरूर रखें.

मंगलवार के दिन महावर नहीं लगाना चाहिए
पूजा-पाठ, त्योहार और शादी ब्याह के अवसर पर आलता लगाते समय दिन का भी ध्यान रखना बेहतर होता है. बता दें कि मंगलवार के दिन महावर नहीं लगाना चाहिए. इस दिन आलता लगाना शुभ नहीं माना जाता है.

किसी कि मृत्य के बाद नहीं लगाना चाहिए
यदि किसी घर में किसी की भी मृत्यु हो जाती है तो महिलाओ को महावर नहीं लगाना चाहिए जब तक कि शुध्द क्रिया नहीं हो जाती है. तेरह दिन की तक कर्म कांड में महिलाओ को श्रृंगार आदि करना वर्जित किया गया है.

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महिलाओं का है ये श्रृंगार, आखिर क्यों महिलाएं पैरों में लगाती हैं आलता?

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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