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पृथ्वी से प्रकट हुए भोलेनाथ! कोई नहीं लौटता खाली हाथ, बढ़ौरानाथ मंदिर की दिलचस्प कहानी

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Sidhi News: शिव मंदिर के पुजारी रामलाला मिश्रा ने Bharat.one से कहा कि जब गांव में खुदाई हो रही थी, तब शिवलिंग धीरे-धीरे प्रकट होता चला गया. जमीन में जितनी गहराई तक खुदाई की गई, शिवलिंग की लंबाई उतनी ही बढ़ती चली गई.

सीधी. मध्य प्रदेश का सीधी जिला ऐतिहासिक विरासत और गहरी धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है. सैकड़ों-हजारों वर्ष पुराने मंदिर, बीरबल की जन्मस्थली और बढ़ौरा मंदिर यहां की पहचान हैं. सीधी को बढ़ौरा नाथ स्वामी की नगरी भी कहा जाता है. सोन नदी के पास स्थित बढ़ौरा नाथ स्वामी का प्राचीन शिव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर एक हजार वर्ष से भी ज्यादा पुराना बताया जाता है. मान्यता है कि यहां विराजमान शिवलिंग स्वयंभू है, जो आजादी से पहले साल 1940 के आसपास खुदाई के दौरान प्रकट हुए थे. खास बात यह है कि यह शिवलिंग चतुर्भुजाकार है और इसमें अर्धनारीश्वर स्वरूप, माता पार्वती और त्रिशूल के चिन्ह स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं, जो इसे अन्य शिवलिंगों से अलग और विशिष्ट बनाते हैं.

शिव मंदिर के पुजारी रामलाला मिश्रा ने Bharat.one को जानकारी देते हुए बताया कि जब गांव में खुदाई हो रही थी, तब शिवलिंग धीरे-धीरे प्रकट होता गया. जितनी गहराई तक खुदाई की गई, शिवलिंग की लंबाई बढ़ती ही चली गई. शिवलिंग जलहरी सहित मिली थी, जिसने लोगों की आस्था को और मजबूत कर दिया. इसके बाद तत्कालीन चुरहट रियासत के अंतिम शासक राव रण बहादुर सिंह को सूचना दी गई और फिर मंदिर का निर्माण कराया गया.

भक्तों की रोजाना लगती कतार
उन्होंने आगे कहा कि आज बढ़ौरा नाथ स्वामी मंदिर में हर दिन भक्तों की लंबी कतार देखने को मिलती है. हजारों श्रद्धालु यहां दूध और जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं. फूल, बेलपत्र, दूर्वा, चंदन और रोली से भोलेनाथ का श्रृंगार किया जाता है. मंदिर परिसर में सत्यनारायण कथा, रामचरित मानस पाठ, सुंदरकांड के आयोजन के साथ-साथ मुंडन, कर्णछेदन, विवाह और अन्य संस्कार भी संपन्न होते हैं.

खाली हाथ नहीं लौटते भक्त
पुजारी रामलाला मिश्रा ने बताया कि बढ़ौरा नाथ के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. यहां प्रतिदिन रुद्राभिषेक होता है. भक्तों पर आने वाले संकटों का सामना स्वयं बढ़ौरा नाथ स्वामी करते हैं. मंदिर में सालभर धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं लेकिन महाशिवरात्रि, बसंत पंचमी और सावन माह में यहां विशेष रौनक देखने को मिलती है. सावन शिवरात्रि के आसपास लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और विशाल मेला लगता है. श्रावण, अगहन और फाल्गुन मास में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. बढ़ौरा नाथ स्वामी का यह प्राचीन शिवधाम न सिर्फ सीधी जिले की धार्मिक पहचान है बल्कि श्रद्धा, विश्वास और चमत्कारों का ऐसा केंद्र है, जो हर आने वाले भक्त को आस्था से भर देता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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पृथ्वी से प्रकट हुए भोलेनाथ! कोई नहीं लौटता खाली हाथ, बढ़ौरानाथ मंदिर की कहानी

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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