Last Updated:
Paush month 2025 : अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम ने बताया कि यह महीना पूजा-पाठ, जप, तप और दान-पुण्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इस दौरान कुछ विशेष शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है. आइए जानते हैं कि पौष मास में कौन से शुभ कार्य वर्जित होते हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं.

अयोध्या के ज्योतिषी पंडित कल्कि राम ने बताया कि 5 दिसंबर से पौष माह की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन 3 जनवरी को पूर्णिमा तिथि पर होगा. धार्मिक मान्यता है कि इस महीने नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं, जबकि कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हें भूलकर भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे अशुभ फल दे सकते हैं.

इस महीने भूलकर भी विवाह मुंडन गृह प्रवेश नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए. क्योंकि इसी महीने खरमास शुरू होता है .और खरमास के महीने में शुभ कार्यों पर प्रतिबंध रहता है कहा जाता है ऐसा करने से अशुभ फल की प्राप्ति होती है .

पौष माह में तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस पूरे महीने भगवान सूर्य को प्रतिदिन जल अर्पित करना और सूर्य देव के वैदिक मंत्रों का जाप करना जीवन की कई परेशानियों को दूर करता है. माना जाता है कि नियमित रूप से अर्घ्य देने से सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है और आत्मविश्वास, स्वास्थ्य तथा सफलता में वृद्धि होती है.
Add Bharat.one as
Preferred Source on Google

इस महीने गुड़, अदरक, लहसुन और तिल का सेवन अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये चीजें शरीर को ऊष्मा देने के साथ-साथ सौभाग्य भी बढ़ाती हैं. पौष माह में नए अनाज के सेवन से पहले देवी-देवताओं को भोग लगाना अनिवार्य बताया गया है. मान्यता है कि पहले ईश्वर को अर्पित किए बिना नया अन्न ग्रहण करने से उसका पूर्ण फल नहीं मिलता.

इस महीने भगवान की भक्ति में मन लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है. वाणी पर संयम रखना, क्रोध से दूर रहना और सौम्य व्यवहार रखना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है. धार्मिक मान्यता है कि पौष माह में तेल की मालिश करने से भी परहेज़ बताया गया है. साथ ही, इस महीने नया व्यवसाय शुरू करना या कोई बड़ा काम आरंभ करना भी उचित नहीं माना गया है.















