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लगातार बीमार पड़ना सिर्फ शारीरिक कमजोरी नहीं, बल्कि कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों के दोष का संकेत भी हो सकता है. अगर आप भी बिना कारण बार-बार बीमार पड़ रहे हैं, तो किसी योग्य डॉक्टर के साथ-साथ किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से कुंडली की जांच जरूर कराएं. सही समय पर सही उपाय अपनाकर स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है.
देवघर. अक्सर देखा जाता है कि कई लोग बार-बार बीमार पड़ते रहते हैं. कभी सर्दी-खांसी, कभी पेट से जुड़ी परेशानी तो कभी बिना किसी स्पष्ट वजह से कमजोरी और थकान बनी रहती है. आमतौर पर लोग इसे केवल शारीरिक कमजोरी या बदलते मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे ज्योतिषीय कारण भी हो सकते हैं. देवघर के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने Bharat.one के संवाददाता से बातचीत में बताया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार बीमार पड़ रहा है और इलाज के बावजूद पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पा रहा है, तो उसकी कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों का दोष भी इसकी एक बड़ी वजह हो सकता है.
खासकर जब कुंडली में मंगल, चंद्रमा, राहु या केतु की दशा अशुभ चल रही हो, तब व्यक्ति को बार-बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ज्योतिषाचार्य पंडित मुदगल के अनुसार, मंगल ग्रह रक्त, ऊर्जा और शरीर की ताकत का कारक होता है. यदि मंगल कमजोर या पीड़ित हो, तो शरीर में कमजोरी, चोट, बुखार या सूजन जैसी समस्याएं बनी रहती हैं. वहीं चंद्रमा मन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा ग्रह है. चंद्रमा की खराब स्थिति से तनाव, नींद की कमी और मानसिक अस्थिरता के कारण भी व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ सकता है. इसके अलावा राहु-केतु की अशुभ दशा अचानक होने वाली बीमारियों और लंबे समय तक चलने वाली समस्याओं का कारण बन सकती है.
बार-बार बीमार हो रहे है धारण कर ले मूंगा
ऐसे में ज्योतिषाचार्य मूंगा रत्न धारण करने की सलाह देते हैं. मूंगा मंगल ग्रह का रत्न माना जाता है और इसे धारण करने से शरीर की ऊर्जा बढ़ती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और स्वास्थ्य में सुधार होता है. मूंगा रत्न सोने या तांबे की अंगूठी में जड़वाकर दाहिने हाथ की अनामिका उंगली में पहनना शुभ माना जाता है. इसे मंगलवार के दिन, सूर्योदय के बाद, “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का जाप करके धारण करना चाहिए. हालांकि, पंडित मुदगल ने यह भी स्पष्ट किया कि ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को किसी भी हालत में बंद नहीं करना चाहिए. रत्न और उपाय सहायक होते हैं, इलाज का विकल्प नहीं. सही चिकित्सकीय उपचार के साथ जब ज्योतिषीय उपाय किए जाते हैं, तब व्यक्ति को जल्दी लाभ मिलता है.
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