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बीमार पति को नहीं हो रहा था फायदा, कर्ज में डूब गया था परिवार, पत्नी ने किया छठ व्रत, अब लगने लगी दवा

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सीतामढ़ी. लोक आस्था का महापर्व छठ बिहार और उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. यह पर्व सिर्फ हिंदू समाज के लोग ही नहीं, बल्कि कुछ मुस्लिम परिवार भी श्रद्धापूर्वक करते हैं. जिनकी मनोकामना पूरी होती है, वे अपनी मनौती के अनुसार छठ व्रत का संकल्प लेते हैं और इसे निभाते हैं. ऐसा ही एक मामला शिवहर जिले के तरियानी का है, जहां 35 साल पहले तरियानी छपरा निवासी मोहम्मद जमालुद्दीन गंभीर रूप से बीमार हो गए थे. बीमारी इतनी बढ़ गई कि उन्हें अपना घर तक बेचने की नौबत आ गई, और वे कर्ज में डूब गए. किसी के सुझाव पर उन्होंने छठ व्रत करने का संकल्प लिया. हालांकि, व्रत रखना आसान नहीं था और उन्हें समाज के कई विरोधों का सामना करना पड़ा. फिर भी उन्होंने साहस के साथ बागमती नदी में जाकर भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया. इसके बाद उनकी तबीयत धीरे-धीरे सुधरने लगी, और उनका स्वास्थ्य बेहतर हो गया.

इससे उनकी आस्था बढ़ी. वे लगातार छठ करने लगीं. इसके बाद विभिन्न बीमारी से ग्रस्त उनके गांव की सबीना खातून, रुखसाना खातून मो. शाहिद व लाडो खातून सहित दर्जनभर मुस्लिम समुदाय के लोग छठ व्रत के लिए घर लौटे हैं. दर्जनभर महिला व पुरुषों ने छठ महापर्व करना शुरू किया. वर्तमान में मुस्लिम समाज के दर्जन भर लोग विधि-विधान से महापर्व कर रहे हैं. नहाय-खाय से लेकर खरना तक और अर्घ्य भी दे रहे हैं. उनके घरों में छठ के गीत बज रहे हैं. अभावग्रस्तता के बीच जी रही इसी गांव की रुखसाना खातून के लिए जिंदगी की सफर की राह आसान नहीं थी.

छठ व्रत से जुड़ी आस्था अपरंपार
सरकार की ओर से चावल-गेहूं मिल जाता था, लेकिन इसके बाद बीमारी, पढ़ाई और अन्य मद में होने वाली खर्च के लिए कोई रास्ता नहीं था. वह भी छठ व्रत रखने लगी और छठ ने उसकी राह की बाधाएं खत्म कर दी. 40 परिवारों की इस बस्ती में दर्जनभर लोग साल दर साल आस्था का अर्घ्य देते हैं. सूर्य उपासना करते हैं. इस बार भी उनकी तैयारी जारी है. बेहद गरीब परिवार से आने वाले इन परिवारों ने आस्था की दीवार तोड़ समाज को नई सीख दी है. लाडो खातून बताती हैं कि छठ व्रत से जुड़ी आस्था अपरंपार है. कम पढ़ी लिखी होने के बावजूद कहती हैं कि धर्म के आधार पर लोग नहीं बंटे, क्योंकि सबका मालिक एक है. 29 सितंबर को इलाके में आई बाढ़ के चलते सबसे ज्यादा लोग तरियानी छपरा के ही प्रभावित हुए हैं. मो. जमालुद्दीन व सबीना खातून सहित सैकड़ों लोग 32 दिन व 32 रात तटबंध पर गुजार छठ व्रत करने के लिए घर लौटे हैं. घर भी ध्वस्त हो गया है. घरों में अब भी पानी बरकरार है. सरकार द्वारा मिलने वाली सात हजार की राशि भी नहीं मिल सकी है. लिहाजा इन गरीब परिवारों के इन लोगों के लिए बार छठ महापर्व की राह आसान नहीं रह गई है. बावजूद इसके बाढ़ की पीड़ा पर आस्था भारी है और यहां के लोग छठ की तैयारी में है.

FIRST PUBLISHED : November 6, 2024, 17:11 IST

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