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भक्ति का जज्बा ऐसा कि सब देखते रह जाएं, 92 साल की दादी अम्मा घर में बिना बताए पहुंचीं महाकुंभ, 1945 से आ रहीं कुंभ

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Mahakumbh 2025: 13 जनवरी से प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन पहुंच रहे हैं. वहीं, इस महाकुंभ में एक 92 साल की बुजुर्ग महिला भी पहुंची हैं, जो इन दिनों आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं.

भक्ति का जज्बा ऐसा कि सब देखते रह जाएं, 92 साल की दादी बिना बताए पहुंचीं कुंभ

दादी मां पहुंचीं महाकुंभ. PC: thenewspost

हाइलाइट्स

  • 13 जनवरी से प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है.
  • 92 साल की बुजुर्ग महिला पहुंची कुंभ.

Mahakumbh 2025 : आस्था और विश्वास की शक्ति इतनी गहरी होती है कि उम्र और शारीरिक स्थिति केवल संख्याएं बन कर रह जाती हैं. एक व्यक्ति जब ठान लेता है कि उसे कोई काम करना है, तो उसे किसी भी चुनौती से डर नहीं लगता. धनबाद की 92 वर्षीय तारा देवी इसका बेहतरीन उदाहरण हैं. उनके हौसले और आस्था ने यह साबित कर दिया कि जब आत्मविश्वास मजबूत हो, तो किसी भी यात्रा को पूरा किया जा सकता है.

92 साल की वृद्धा की आस्था का प्रदर्शन
तारा देवी ने महाकुंभ के शाही स्नान में शामिल होने के लिए अपनी यात्रा अकेले ही शुरू की. बिना किसी से बताए उन्होंने रात के अंधेरे में घर छोड़ा, ट्रेन पकड़ी और प्रयागराज पहुंच गईं. यहां तक कि उन्होंने फोन भी साथ नहीं लिया, क्योंकि उनकी आस्था और विश्वास उन्हें अपने उद्देश्य तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त थे. यह कोई साधारण यात्रा नहीं थी. यह एक 92 साल की वृद्धा की आस्था का प्रदर्शन था. आज ये पूरे समाज के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई हैं.

1945 से लगातार हर कुंभ में भाग लिया
ध्यान देने वाली बात यह है कि तारा देवी ने महाकुंभ में भाग लिया है और यह पहली बार नहीं था. उन्होंने 1945 से लगातार हर कुंभ में भाग लिया और गंगा स्नान किया है. महाकुंभ में लाखों श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन तारा देवी की तरह अकेले और उम्रदराज़ व्यक्ति का वहां पहुंचना अपने आप में एक बड़ी बात है. उनका हौसला और श्रद्धा देखकर हर कोई हैरान है.

इस बारे में सिर्फ पोती को बताया
इस यात्रा के दौरान तारा देवी ने यह भी बताया कि उनकी पोती को उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में बताया था, लेकिन अन्य किसी को इस बारे में नहीं बताया. यह उनके भीतर की दृढ़ता और आस्था का प्रतीक है. तारा देवी की यह यात्रा हमें सिखाती है कि अगर मन में विश्वास हो और इरादा मजबूत हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता.

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