महाभारत के दौर में भी किसी स्त्री के एक से ज्यादा पति होना हैरत की बात थीपांच पति होने के कारण द्रौपदी को अक्सर लांक्षन और ताने सुनने ही पड़ते थेकौरव अक्सर उसके चरित्र पर सवाल उठाते थे और अपमान करते थे
ये बात एकदम सही है कि पांच पति होने के कारण द्रौपदी को अक्सर उलाहने और ताने सुनने को मिलते थे. कई बार तो इसे लेकर उसे इतनी कटु बातें सुना दी जाती थीं कि बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता था. कर्ण से लेकर दुर्योधन ने इसे लेकर उसके चरित्र पर सवाल उठाए. उस पर फब्तियां कसीं. तब जब भी ऐसा होता था, तब वह खून का घूंट पीकर रह जाती थी.
महाभारत के दौर को आमतौर पर द्वापर युग के नाम से जाना जाता है. द्वापर युग हिंदू धर्म के अनुसार चार युगों में एक है. इन चार युगों को सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलयुग कहा जाता है.
उस दौर में भी किसी महिला के पांच पति नहीं हुआ करते थे. अलबत्ता पतियों की जरूर कई पत्नियां हो सकती थीं. तब कोई सोच भी नहीं सकता था कि एक विवाहित महिला के एक से ज्यादा पति हो सकते हैं. लिहाजा द्रौपदी के पांच पति होना उस दौर में भी ना केवल हैरत वाली बात थी बल्कि गाहे-बगाहे इसे लेकर उसे ताने और अपमान झेलने पड़ते. हालांकि ये कहना चाहिए द्रौपदी उस युग की प्रभावशाली महिला थीं.
विशेष रूप से कौरवों और अन्य विरोधियों ने पांच पतियों को लेकर कई बार उसका अपमान किया. कटु वचन कहे. चरित्र पर सवाल खड़े किए.
पांच पतियों की पत्नी होने से द्रौपदी को सामाजिक ताने सुनने पड़ते थे. कौरव तो खासतौर इस वजह से उसका अपमान करते रहते थे. (image generated by Leonardio AI)
चीरहरण का प्रसंग
जब युधिष्ठिर ने जुए में द्रौपदी को दांव पर लगाया और हार गए तो उसे सभा में लाया गया, तब दुर्योधन और कौरवों ने उसका उपहास किया. दुर्योधन ने ताने देते हुए कहा, “तुम्हारे पाँच पति हैं, फिर भी तुम अब पराई हो चुकी हो. तुम्हारा अधिकार किस पर है?”
यह ताना द्रौपदी के लिए अपमानजनक था, क्योंकि कौरवों ने उनकी पांच पतियों की स्थिति को उनकी असहायता के रूप में पेश किया.
कर्ण द्वारा अपमान
जब द्रौपदी चीरहरण के दौरान अपने सम्मान की रक्षा के लिए सहायता मांग रही थीं, तो कर्ण ने कठोर शब्दों के जरिए उसे अपमानित किया. यहां तक कि उसे वैश्या तक कह दिया,
“एक वेश्या की तरह, जो कई पुरुषों से संबंध रखती है, वैसे ही तुम पांच पतियों की पत्नी हो. तुम्हें लज्जा का अधिकार नहीं.”
कर्ण के ये शब्द द्रौपदी के लिए गहरा मानसिक आघात थे.
सामाजिक ताने
कुछ प्रसंगों में उल्लेख है कि समाज में द्रौपदी की पांच पतियों की पत्नी होने पर प्रश्न उठाए गए. लोग इसे सामान्य स्त्रियों के आदर्श से भिन्न मानते थे. इसे आलोचना का विषय बनाते थे.
अगर समाज इस बात के खिलाफ था तो पांच पतियों के साथ रहने के कारण द्रौपदी को भावनात्मक रूप से काफी उथल-पुथल का सामना करना पड़ता था. उसे हर पति के साथ अलग-अलग संबंध बनाए रखने होते थे.
दरअसल उस समय के समाज की जो स्थिति थी, उसमें अक्सर अगर उसके चरित्र पर सवाल उठाए गए हों तो स्वाभाविक रहा होगा. अक्सर उसे पांच पतियों वाली स्त्री कहकर माखौल उड़ाया जाता था. (Image gENERATED BY Leonardi AI)
दरअसल उस समय के समाज की जो स्थिति थी, उसमें अक्सर अगर उसके चरित्र पर सवाल उठाए गए हों तो स्वाभाविक रहा होगा. अक्सर उसे पांच पतियों वाली स्त्री कहकर माखौल उड़ाया जाता था.
जयद्रथ का ताना
जब जयद्रथ ने द्रौपदी का अपहरण करने का प्रयास किया, तो उसने व्यंग्य करते हुए कहा:
“तुम्हारे जैसे रूपवान स्त्री को केवल एक पति क्यों नहीं मिला? पांच पतियों के बाद भी तुम अकेली हो.”
यह टिप्पणी द्रौपदी के जीवन की त्रासदी पर चोट करने के लिए की गई थी.
कौरव लगातार अपमान करते थे
कौरवों ने द्रौपदी के पांच पतियों होने का मुद्दा अक्सर उनके अपमान के लिए इस्तेमाल किया. उन्होंने द्रौपदी को कई तरह के ताने दिए. चरित्र पर सवाल उठाए.
– कौरवों ने द्रौपदी के चरित्र पर लगातार सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एक स्त्री के लिए एक से अधिक पति होना व्यभिचार है.
– कौरवों ने द्रौपदी को समाज से बहिष्कृत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि पांच पतियों वाली स्त्री समाज में रहने की योग्य नहीं है.
– कौरवों ने द्रौपदी को कई अपमानजनक उपनामों से पुकारा. जैसे कि, ‘पांच पतियों वाली’, ‘व्यभिचारिणी’ आदि.
– दुर्योधन ने द्रौपदी का अपमान करने के लिए कई मौके ढूंढे. उन्होंने द्रौपदी के सामने अपनी शक्ति प्रदर्शित की और उसे नीचा दिखाने की कोशिश की.
– दुशासन ने द्रौपदी का वस्त्रहरण करने की कोशिश की, जो कि उस समय का सबसे बड़ा अपमान था. इस घटना ने द्रौपदी के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया.
स्वंयवर के बाद जब द्रौपदी पांडवों के साथ घर आई और उसको पता लगा कि अर्जुन नहीं बल्कि पांचों पांडव उसके पति होंगे तो वह बहुत दुखी हुई थी. (Image generated by Leonardio AI)
द्रौपदी की क्या प्रतिक्रिया होती थी
द्रौपदी इन तानों और अपमानों का सामना साहस और आत्मसम्मान के साथ करती थीं. उसने अपनी गरिमा बनाए रखी. अन्याय का विरोध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. चीरहरण की सभा में वह अपने सवालों से वहां बैठे लोगों के सिर झुका देती है. लिहाजा अपनी इस स्थिति को द्रौपदी ने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. महाभारत में द्रौपदी का चरित्र जाहिर करता है कि एक स्त्री कितनी साहसी और दृढ़ हो सकती है. हालांकि ये बात सही है कि वह अक्सर इन बातों से क्रोध में भी भर उठती थी.
तब द्रौपदी दुखी हुई
स्वयंवर में अर्जुन की जीत के बाद जब वह पांडवों के साथ घर पहुंचती है और कुंती की बात के बाद तय हो जाता है कि उसे अब पांचों भाइयों की पत्नी बनना होगा तो उसके सिर पर पहाड़ टूट पड़ता है. वह पांचों पांडवों से विवाह की बात पर काफी आश्चर्यचकित और दुखी होती है.
FIRST PUBLISHED : December 24, 2024, 12:40 IST

















