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महामारी ने मचाया था हाहाकार, लोग तोड़ रहे थे दम, तभी सपने में मिला संकेत, फिर मां दुर्गा ने दिखा दिया चमत्कार

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Navratri 2025: बलिया के जापलिनगंज स्थित दुर्गा मंदिर की स्थापना श्रीकांत चौबे ने महामारी के दौर में की थी, जो आज नीरज पाठक के नेतृत्व में आस्था और चमत्कार का बड़ा केंद्र बन गया है.

सनन्दन उपाध्याय/बलिया: शहर में स्थित एक ऐसा प्राचीन मंदिर, जो कभी महामारी के भयावह दौर में लोगों की उम्मीद बना था. आज यही मां का दरबार लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. यह मंदिर न केवल कोई सामान्य धार्मिक स्थल है, बल्कि एक ऐसे विश्वास और चमत्कार की कहानी बयां करता है, जिसने एक पूरी पीढ़ी को आध्यात्मिक बल मिला था. जानकारी के अनुसार, करीब 60 साल पहले जब बलिया शहर चेचक की महामारी की चपेट में आ गया था, तब हर तरफ हाहाकार मचा हुआ था. इलाज के अभाव में लोग दम तोड़ रहे थे और लोग डर के साए में जीने को मजबूर हुए थे.

जनपद के जापलिनगंज इलाके में स्थित दुर्गा मंदिर के पुजारी नीरज पाठक ने कहा कि उसी समय श्रीकांत चौबे नामक एक साधक को एक दिव्य दर्शन सपने में हुआ. उन्होंने सपने में देखा कि मां दुर्गा स्वयं उन्हें दर्शन देकर निर्देश दे रही हैं कि एक विशेष स्थान पर मंदिर की स्थापना की जाए और वहां पूजा-अर्चना की जाए. स्वप्न को ईश्वरीय संकेत मानते हुए चौबे ने उसी स्थान पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की शुरुआत करा दी. आगे जानिए

मां दुर्गा का पूजा पाठ होने लगा और धीरे-धीरे लोगों का विश्वास इस स्थान से गहरा होता चला गया. स्थानीय निवासियों ने मिलकर नियमित पूजा-पाठ शुरू किया और देखते ही देखते महामारी का प्रकोप कम होने लगा. लोगों को लगा जैसे मां दुर्गा ने अपने भक्तों की पुकार सुन ली हो. यही वह मोड़ था, जब यह स्थान न केवल एक मंदिर था, बल्कि श्रद्धा का बड़ा केंद्र बन गया. जिले के शहर में स्थित मां के इस मंदिर की स्थापना के पीछे की यह भावनात्मक और चमत्कारी कथा आज भी वहां के लोगों की जुबान पर है.

वर्तमान में इस मंदिर के पुजारी नीरज पाठक हैं, जो अपने गुरु श्रीकांत चौबे की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. नीरज बताते हैं कि यहां आने वाले हर भक्त की झोली मां दुर्गा भर देती है. चाहे संतान प्राप्ति की बात हो, रोग-मुक्ति की कामना हो या फिर मानसिक शांति की तलाश… यह मां दुर्गा का दरबार सबका सबका आधार है. जहां नवरात्रि में तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मंदिर अब एक भव्य रूप ले चुका है और दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस…और पढ़ें

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस… और पढ़ें

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