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महाशिवरात्रि के दिन इस वक्त करें भोलेनाथ की पूजा अर्चना…सब पाप होंगे नष्ट, बरसेगी महाकाल की कृपा

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Agency:Bharat.one Jharkhand

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Mahashivratri Puja Time: बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन प्रातः काल पूजा करना शुभ माना जाता है, लेकिन रात्रि पूजा और जागरण का विशेष महत्व होता है. इस दि…और पढ़ें

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महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर में की जानी चाहिए पूजा रखना

हाइलाइट्स

  • महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है.
  • रात्रि पूजा और जागरण का महाशिवरात्रि पर विशेष महत्व है.
  • चार प्रहर की पूजा से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है.

परमजीत /देवघर : हिन्दू परम्परा के लिए महाशिवरात्रि का दिन का बेहद खास महत्व होता है. माना जाता है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे. इसलिए इस दिन को प्रकाट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है.इसके साथ ही शिवपुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था.इसलिए इस दिन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. वहीं महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा पूरे विधि विधान शुभ समय के साथ करनी चाहिए. तभी भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती प्रशन्न होती है.महाशिवरात्रि के दिन कब करें भगवान भोलेनाथ की पूजा जानते है देवघर मंदिर के तीर्थपुरोहित से?

क्या कहते हैं बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित :
बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने लोकल 18के संवाददाता से बातचित करते हुए कहा की महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. साल 2025 मे महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी को मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि के दिन व्रत अवश्य रखनी चाहिए. व्रत रखकर की भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की पूजा आराधना करे. भगवान भोलेनाथ की पूजा मे बेलपत्र, भाँग, धतूरा या आँक का पुष्प साथ ही पंचामृत अवश्य अर्पण करे. इसी भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती प्रशन्न होती है.

कब करे भगवान भोलेनाथ की पूजा :
बैद्यनाथ मंदिर के प्रसिद्ध तीर्थपुरोहित प्रमोद श्रृंगारी बताते है की वैसे तो शिवभक्त महाशिवरात्रि के दिन प्रातः काल ही पूजा आराधना करते हैं लेकिन महाशिवरात्रि के दिन रात्रि पूजा का विशेष महत्व होता है और रात्रि जागरण का महत्व है. महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर पूजा आराधना की जाती है. चार प्रहर पूजा में धर्म, अर्थ काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है. पहले प्रहार की पूजा संध्या काल में की जाती है यानी प्रदोष काल के समय प्रदोष काल में भगवान भोलेनाथ के ऊपर दूध अभिषेक किया जाता है दूसरे प्रहर की पूजा रात 9 बजे से 12बजे के बीच में की जाती है. इसमें भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग पर दही से अभिषेक किया जाता है. तीसरे प्रहर की पूजा रात 12 बजे से लेकर 3 तक की जाती है. इस पहर में भगवान भोलेनाथ को जल से अभिषेक कराया जाता है और घी भी अर्पण किया जाता है. चौथे प्रहर की पूजा ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 3 बजे से लेकर 6 बजे तक की जाती है. जिसमें भगवान भोलेनाथ के ऊपर शहद अर्पण किया जाता है.

चार प्रहर मे पूजा करने से साधक के सभी पाप होते है नष्ट :
महाशिवरात्रि के दिन अगर साधक चारों प्रहर में भगवान भोलेनाथ की पूजा आराधना करता है तो साधक के जीवन मे हुए भूलवश पाप नष्ट हो जाता है और सभी प्रकार की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं.

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महाशिवरात्रि के दिन इस वक्त करें भोलेनाथ की पूजा अर्चना…सब पाप होंगे नष्ट!

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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