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मार्गशीर्ष माह में ये चूक पड़ सकती है भारी, इन गलतियों से दूरी बनाना जरूरी, उज्जैन के आचार्य से जानें

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हिन्दू धर्म में प्रत्येक तिथि, वार और माह का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व माना गया है  पंचांग का नवां महीना मार्गशीर्ष मास आरंभ हो चुका है. इसे अगहन के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह महीना अत्यंत पवित्र माना गया है. इस अवधि में किया गया स्नान, दान और दीपदान व्यक्ति के पापों का नाश करता है और उसे मोक्ष की राह प्रदान करता है.

स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में मार्गशीर्ष को सभी महीनों में श्रेष्ठ बताया है, जो इस माह के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ा देता है. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज बताते हैं कि मार्गशीर्ष में कुछ विशेष आहार संबंधी नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना गया है. इन नियमों का ध्यान रखने से न केवल स्वास्थ्य लाभ मिलता है, बल्कि धार्मिक रूप से भी शुभ फल प्राप्त होते हैं.

मार्गशीर्ष मास में किन बातों से रहें सावधान
मार्गशीर्ष का पवित्र महीना अनुशासन और सात्त्विकता का समय माना गया है. इस दौरान झूठ, क्रोध, घमंड, किसी का अपमान या हानि पहुँचाने जैसे कर्म बेहद अशुभ फल देते हैं, इसलिए इनसे दूर रहना आवश्यक है. इस माह में मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक आहार के साथ-साथ जीरे का सेवन भी वर्जित माना गया है. भोजन में हल्का, सात्त्विक और ताज़ा पदार्थ ही ग्रहण करना शुभ रहता है.

इन सब्जियों से बनाए दूरी 
मार्गशीर्ष मास में बैंगन, मूली और जीरे जैसी सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, इस महीने में तामसिक भोजन, बासी भोजन और ठंडा भोजन करने से बचना चाहिए. सात्विक भोजन करने और ध्यान व साधना के लिए मन को शांत रखने की सलाह दी जाती है.

मार्गशीर्ष मास में क्या करें
– मार्गशीर्ष का पवित्र महीना आस्था और साधना का समय माना जाता है. इस दौरान प्रतिदिन भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक और सात्त्विक भोजन करना अत्यंत शुभ माना गया है. पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है, जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है.

सुबह और शाम घर, मंदिर तथा तुलसी के समीप दीप प्रज्ज्वलित करना सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का आगमन कराता है.. जरूरतमंदों की सहायता करना इस मास में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है.

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप तथा भगवद्गीता का पाठ मन को स्थिरता और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है. इस माह में वचन, कर्म और मन से स्वयं को शुद्ध रखें और धर्मग्रंथों का अध्ययन अवश्य करें.

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