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Maa vindhyavasini temple : कहा जाता है कि इस नागकुंड को 2500 साल पहले नागवंशियों ने बनवाया था. इस नागकुंड में कुल 52 घाट है. चारों तरफ से सीढ़ियां हैं. इसमें भक्त स्नान के साथ पूजन भी कर सकते हैं. पहले मांगने पर इसमें से बर्तन निकलते थे, लेकिन मन में लालच आने के बाद बर्तन इत्यादि सामान निकलना खुद बंद हो गए.
मिर्जापुर. ये धरती से पाताल जाने का रास्ता है. सुनने के बाद थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन इसे हकीकत में पाताल लोक का रास्ता कहा जाता है. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित प्राचीन नागकुंड को धरती से पाताल जाने का मार्ग कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि पाताल लोक के रास्ते होते हुए नागवंशी राजा मां विंध्यवासिनी धाम में आते थे. यहां पर दर्शन के बाद इसी कुंड से वापस चले जाते थे. आज भी ये कुंड हजारों रहस्यों को समेटे हुए मौजूद है. किदवंती है कि यहां पर दर्शन करने से कालसर्प दोष और स्वप्न में सर्प दिखने जैसे दोष खत्म हो जाते हैं. हजारों साल पहले बने इस कुंड को रहस्मयी माना जाता है.
52 घाट, हर तरफ से सीढ़ियां
विंध्यधाम के पं. अनुपम महराज Bharat.one से बताते हैं कि विंध्याचल में मौजूद कई रहस्मयी स्थलों में प्राचीन नागकुंड भी है. नागकुंड को 2500 वर्ष पहले नागवंशियों ने बनवाया था. इस नागकुंड में कुल 52 घाट है, जहां चारों तरफ से सीढ़ियां है. इसमें भक्त स्नान के साथ पूजन और अर्चन कर सकते हैं. कहा जाता था कि इसी रास्ते से नागवंशी अपने कुलदेवी मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए आते थे. मां विंध्यवासिनी के धाम में दर्शन के बाद वापस चले जाते थे. प्राचीन समय में कुंड से जरूरत पर मांगने पर बर्तन इत्यादि निकलते थे. हालांकि, लालच मन में आने के बाद बर्तन इत्यादि सामान निकलना बंद हो गए.
नागपंचमी पर जमघट
पं. अनुपम महराज के मुताबिक, ये कुंड न सिर्फ रहस्मयी है बल्कि, ऐसी मान्यता है कि यहां पर दर्शन करने से काल सर्प दोष और सपने में दिखने वाले सर्पदोष से मुक्ति मिलती है. काफी लोगों को दोष से मुक्ति भी मिली है. नागपंचमी पर यहां हजारों की संख्या में लोग आते हैं और दर्शन पूजन करते हैं. कुंड में एक कुआं है, जिसमें सभी लोग स्नान करते हैं. अलग-अलग किदवंतियों को समेटे हुए ये कुंड आज भी वैसे ही है. यहां की महत्ता भी वैसे ही बरकरार है.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
















