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यहां मंदिर की चौखट पर लिखा ‘अल्लाह’, कलमा से भी जुड़ा इतिहास, अद्भुत संगम देखने दूर-दूर से आते हैं लोग

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Agency:Bharat.one Madhya Pradesh

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Rauriha Nath Temple history: रीवा जिले का रौरिहा नाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति का एक जीवंत उदाहरण है. यह मंदिर न केवल भगवान शिव के भक्तों को आकर्षित करता है, बल्कि उन लो…और पढ़ें

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विंध्य

विंध्य का एक ऐसा सैकड़ो वर्ष पुराना अनोखा मंदिर जहां ईश्वर और अल्लाह एक ही गुम्ब

Vindhya Rauriha Nath Temple: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले में गुढ़ रोड स्थित खड्डा गांव में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति का अद्भुत प्रतीक है. यह मंदिर केवल भगवान शिव की आराधना का स्थल नहीं है, बल्कि यहां इस्लाम धर्म का पहला कलमा भी अंकित है. 1755 में निर्मित यह शिवालय न केवल धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वास्तुशिल्पीय दृष्टि से भी अनमोल धरोहर है.

रौरिहा नाथ मंदिर
इस शिव मंदिर का निर्माण रीवा राज्य के महाराजा अवधूत सिंह के पुत्र केशव राय द्वारा 1755 में कराया गया था. मंदिर का नाम रौरिहा नाथ मंदिर है, जिसे राउर शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ शाही तालाब होता है. मंदिर तालाब के किनारे स्थित है, और इसकी स्थापत्य कला नागर और मुगल शैली का संगम है.

मंदिर की खासियत
मंदिर दो मंजिला है, जिसकी तंग सीढ़ियां और भव्य गुम्बद इसे विशिष्ट बनाते हैं. गुम्बद का निर्माण पत्थरों की बजाय पतली देशी ईंटों और सुर्खी-चूने से किया गया है. गर्भगृह की दीवारों पर पशु-पक्षियों और विभिन्न आकृतियों की शिल्पकारी की गई है. मुख्य गुम्बद नागर शैली से प्रभावित है, जबकि पश्चिमी द्वार की मेहराब और संरचना मुगल शैली की है.

मंदिर में कलमा का इतिहास
मंदिर की दीवार पर अरबी भाषा में इस्लाम धर्म का पहला कलमा अंकित है. इतिहासकार बताते हैं कि केशव राय की मां और पत्नी मुस्लिम थीं. उनकी मां ने अनुरोध किया था कि इस मंदिर में इस्लाम धर्म का भी सम्मान हो. इस पर केशव राय ने इस्लाम का पहला कलमा एक पत्थर पर लिखवाकर मंदिर की दीवार में स्थापित कराया.

शिल्पकारों की गलती के कारण यह पत्थर उल्टा लगा दिया गया, जो आज भी उसी रूप में है. मंदिर के सामने की चौखट पर “अल्लाह” शब्द भी अंकित है, जो समय के साथ धुंधला हो चुका है.

गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक
यह मंदिर भारतीय संस्कृति की सहिष्णुता और विविधता का उत्कृष्ट उदाहरण है. यहां शिव प्रतिमा के साथ इस्लाम धर्म का कलमा यह दर्शाता है कि विभिन्न धर्म और मान्यताएं एक ही छत के नीचे सह-अस्तित्व में रह सकती हैं.

स्थापत्य कला में कलचुरी प्रभाव
मंदिर के विभिन्न हिस्सों में लगे पत्थर और शिल्प कलचुरी काल की वास्तुकला का प्रतीक हैं. मंदिर में उपयोग किए गए पत्थर और खिड़कियों की संरचना इसे और अधिक अनोखा बनाती है.

मंदिर का महत्व
भगवान शिव की प्रतिमा के साथ इस्लाम का कलमा इसे अनोखा बनाता है.अद्भुत स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व के कारण यह मंदिर पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है.बघेलखंड क्षेत्र में यह मंदिर पंचायतन शैली का सबसे सुंदर उदाहरण है.

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यहां मंदिर की चौखट पर लिखा ‘अल्लाह’, कलमा से भी जुड़ा इतिहास, अद्भुत संगम

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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