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यहां हुई थी भविष्यवाणी! स्वयं प्रकट हुए थे यहां हनुमान जी, 700 साल पुराने बालाजी मंदिर की क्या है मान्यता

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Samod Balaji Temple Jaipur Rajasthan: हनुमान जी के देश में कई ऐसे मंदिर है, जिनके चमत्कार किसी से छिपे नहीं है. ऐसे में आज हम आपको ऐसे बालाजी के मंदिर के बारे में बताते हैं, जिसकी मान्यता है कि यहां पर जिन श्रद…और पढ़ें

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सामोद

सामोद बालाजी मंदिर 

हाइलाइट्स

  • सामोद बालाजी मंदिर जयपुर से 42 किमी दूर स्थित है.
  • मान्यता है कि यहां बालाजी के दर्शन से सभी मुरादें पूरी होती हैं.
  • मंदिर में 700 साल पुरानी हनुमान जी की प्रतिमा है.

जयपुर:- वैसे तो राम भक्त भगवान हनुमान के मंदिर पूरे देश बने हुए हैं, लेकिन, जयपुर शहर से 42 किलोमीटर दूर पहाड़ों के बीच बालाजी का एक ऐसा मंदिर बना है जो बहुत चमत्कारिक है. यह मंदिर सामोद बालाजी के नाम से प्रसिद्ध है. मान्यता के अनुसार भगवान हनुमान यहां चट्टान में स्वयं ही प्रकट हुए थे. दुर्गम पहाड़ियों के बीच बने इस मंदिर में दूर दराज से भक्त आते हैं. इस मंदिर में बालाजी के दर्शन करने के लिए करीब 1100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. मान्यता है कि इन सीढ़ियों पर सच्चे मन से भगवान राम का नाम लेते हुए मंदिर में जाकर बालाजी के जो दर्शन करता है उसकी सभी मुराद पूरी होती है.

क्या है यहां मान्यता 
आपको बता दें, कि ये मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है. इस मंदिर में बालाजी की 6 फीट की प्रतिमा है. सामोद वीर हनुमान जी का मंदिर अपनी बसावट के लिए भी जाना जाता है. यह मंदिर 700 साल पुराना बताया जाता है. मान्यता है कि यहां पर जिन श्रद्धालुओं के कुओं और ट्यूबवेल में पानी नहीं होता, वो यहां से बालाजी का लड्डू लेकर जाते हैं, उनके कुआं या ट्यूबवेल खोदते ही पानी आ जाता है. इसके अलावा जो भी आसपास के लोग गाय भैंस रखते हैं. उनके दूध का दही जमा कर वो पहला भोग भगवान हनुमान को लगाते हैं.

बालाजी ने की थी आकाशवाणी 
सामोद बालाजी मंदिर के पुजारी जगद्गुरु अवध बिहारी देवाचार्य ने बताया कि 700 साल पहले हनुमान जी ने खुद आकाशवाणी की थी. सामोद निवासी पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि लगभग 700 वर्ष पूर्व संत नग्नदास और उनके शिष्य लालदास सामोद पर्वत पर तपस्या करने आए. तब तपस्या के दौरान एक दिन संत नग्नदास ने आकाशवाणी सुनी— “मैं यहां वीर हनुमान के रूप में प्रकट होऊंगा” उसी समय उन्हें पहाड़ी की चट्टान पर साक्षात हनुमान जी के दर्शन भी हुए. आकाशवाणी और हनुमान जी के दर्शन के बाद संत नग्नदास हनुमान आराधना में लीन हो गए. जिस चट्टान पर उन्हें हनुमान जी के दर्शन प्राप्त हुए थे, उसे वे हनुमानजी की मूर्ति का आकार देने लगे. और बाद में मंदिर का निर्माण कराया गया.

पहला धान बालाजी को करते हैं अर्पित 
आपको बता दें, कि सामोद गांव निवासी पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि जो भी किसान अनाज पैदा करता है, वो पहला धान भगवान को अर्पित करता है. यहां जो भी आता है उन सभी की मनोकामना पूर्ण होती है. बालाजी मंदिर ट्रस्ट द्वारा ऋषि कुल विद्यालय और वीर हनुमान गौशाला भी संचालित की जाती है.

कैसे पहुंचें वीर हनुमान मंदिर
जयपुर से सामोद बालाजी मंदिर 42 किलोमीटर के आसपास है. जयपुर से यहां पहुंचने के लिए चोमू होते हुए आना पड़ता है. जयपुर से सामोद हनुमान मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी से लगभग 45 मिनट का समय लगता है. यहां से सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन चोमू है. यहां से सामोद हनुमान मंदिर महज 5 से 7 किलोमीटर की दूरी पर है. इस रेलवे स्टेशन से टैक्सी मिलती है, जो कि 10 से 15 मिनट में सामोद मंदिर पहुंचा देती है. रेलवे स्टेशन से मंदिर जाने के लिए बसें भी नियमित रूप से उपलब्ध हैं.

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यहां स्वयं प्रकट हुए थे हनुमान जी! जानें क्या है समोद बालाजी मंदिर की मान्यता

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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