Home Uncategorized यूपी में यहां भगवान शिव ने कामदेव को जलाकर किया था भस्म,...

यूपी में यहां भगवान शिव ने कामदेव को जलाकर किया था भस्म, आज भी है हजारों साल पुराना जला हुआ पेड़!

0
2


Agency:Bharat.one Uttar Pradesh

Last Updated:

Ballia Kameshwar Dham: बलिया में स्थित कामेश्वर धाम भगवान शिव की तपोस्थली है, जहां कामदेव का दहन हुआ था. हजारों साल पुराना जला हुआ वह आम का पेड़ आज भी है, जिसकी वोट से छिपकर कामदेव ने भगवान के ऊपर बाण चलाया था…और पढ़ें

X

कामेश्वर

कामेश्वर धाम.

हाइलाइट्स

  • बलिया में स्थित है कामेश्वर धाम, शिव की तपोस्थली.
  • यहां भगवान शिव ने कामदेव को जलाकर भस्म किया था.
  • शिवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

सनन्दन उपाध्याय/बलिया: शिव के इस पौराणिक स्थान की कहानी बड़ी रोचक है. इस धार्मिक स्थान की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है. यही पर भगवान श्री राम, लक्ष्मण और विश्वामित्र रात्रि विश्राम करते थे. ये स्वयं भगवान शिव की तपोस्थली रही है. इसी स्थान पर भगवान शिव की तीसरी आंख खुली और कामदेव जलकर भस्म हो गए. तमाम प्राचीन प्रमाण आज भी यहां देखने को मिलते हैं. शिवरात्रि में तो यहां भक्तों का तांता लगता है. विस्तार से जानिए

प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि यहां भगवान शिव ने तपस्या की. इस कारण यह शिव तीर्थ है. उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सदर तहसील में यह कामेश्वर धाम स्थित है. सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव कैलाश छोड़कर  यहां गंगा और सरयू के संगम पर आ गए थे. श्री वाल्मीकि रामायण के बालकांड अध्याय 23, शिव महापुराण और बलिया गजेटियर के आधार पर यह स्थान कामदेव दहन भूमि के नाम से प्रसिद्ध है. क्योंकि भगवान शंकर ने यहीं पर कामदेव का दहन (जलाकर भस्म करना) किया था.

आज भी है वो पेड़, आए थे श्री राम…

हजारों साल पुराना जला हुआ वह आम का पेड़ आज भी है, जिसकी वोट से छिपकर कामदेव ने भगवान के ऊपर बाण चलाया था. इस स्थान की महत्ता बहुत बड़ी है. रामायण काल में भगवान श्री राम और लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ इस स्थान पर आए थे. इसका भी उल्लेख श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 23 वें अध्याय में किया गया है. अयोध्या के राजा कवलेश्वर भी यहां आए. जिसके बाद उन्हें कुष्ठ रोग से मुक्ति मिली.

आस्था का बड़ा केंद्र है ये प्राचीन मान्यताएं…

यह कामेश्वर धाम कारो अघोर पंथ के स्वामी किन्नाराम बाबा के गुरु शिवराम दास भी मठ के महंथ थे. यहीं पर किन्नाराम की पहली दीक्षा हुई थी. यह कामेश्वर धाम बहुत प्राचीन तीर्थ है. यहां पर रानी पोखरा, कवलेश्वर ताल, श्री राम, लक्ष्मण और विश्वामित्र रात्रि विश्राम स्थल और लवड़ी कुंड आज भी है. और सारे स्थान है. वर्तमान समय में तो यह मंदिर बहुत भव्य दिव्य बन गया है. लेकिन, वह प्राचीन स्थान आज भी है.

homedharm

यूपी में यहां भगवान शिव ने कामदेव को जलाकर किया था भस्म, आज भी है जला हुआ पेड़

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here