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रामलला की प्यारी सरयू नदी को क्यों भगवान शिव ने दिया था ये श्राप, जानिए इससे जुड़ी रोचक कथा

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Sarayu River Shrap : हिन्दू धर्म में नदी में स्नान करने को काफी शुभ माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि, जब आप किसी भी पवित्र नदी में स्नान करते हैं तो इससे आपके पाप धुल जाते हैं और आपको पुण्यफल की प्राप्ति होती है. इनमें सबसे पहले नंबर पर गंगा का नाम आता है. वहीं आपने सरयू नदी का नाम भी सुना होगा जिसे घाघरा नाम से भी जाना जाता है. यह नदी उत्तर प्रदेश के अयोध्या से होकर बहती है. इसके बारे में कहा जाता है कि जब आप इस नदी में स्नान करते हैं तो पाप तो धुल जाते हैं लेकिन किसी भी प्रकार का पुण्य आपको नहीं मिलता. इसका कारण भगवान शिव का श्राप है. उन्होंने क्यों श्राप दिया और इसके पीछे की क्या है कथा आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

कैसे प्रकट हुई सरयू नदी?
पुराणों के अनुसार, सरयू नदी भगवान विष्णु के नेत्रों से प्रकट हुई थी. ऐसा कहा जाता है कि एक समय शंखासुर दैत्य हुआ करता था. जिसने वेदों को चुरा लिया था और फिर इन्हें समुद्र में छिपा दिया. इन वेदों की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया. उन्होंने समुद्र से सभी वेदों को सुरक्षित निकाला और वे काफी खुश भी हुए. कहा जाता है कि जब श्रीहरि के खुशी से आंसू निकले तो इसे स्वयं ब्रह्माजी ने एक मानसरोवर में डाल दिया. कथा के अनुसार, इस सरोवर से महापराक्रमी वैवस्वत महाराज ने एक बाण के प्रहार से धरती के बाहर निकाला था, जिसे सरयू नदी कहा गया.

सरयू नदी को क्यों मिला श्राप?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सरयू नदी भगवान राम की प्रिय नदी थी और उन्होंने इसी नदी में समाधि ली थी. चूंकि, भगवान राम ने इस नदी में अपनी लीला का अंत किया इसलिए भगवान शिव सरयू से काफी नाराज हुए. उन्होंने क्रोध में सरयू नदी को श्राप दिया कि तुम्हारा जल कभी भी पूजा-पाठ या शुभ कार्यों में उपयोग नहीं किया जाएगा. यही कारण है कि आज भी सरयू नदी का जल किसी मंदिर में नहीं लाया जाता और ना ही पूजा में उपयोग किया जाता.

FIRST PUBLISHED : October 4, 2024, 15:48 IST

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