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रेत से बने 12 ज्योतिर्लिंग और लक्ष्मण की कठोर साधना, ऋषिकेश के इस शिवधाम की अनोखी मान्यता

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Laxmaneshwar Mahadev Temple Of Rishikesh : ऋषिकेश का लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है, जहां भगवान लक्ष्मण ने रेत से 12 ज्योतिर्लिंग बनाकर वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान शिव ने दर्शन देकर लक्ष्मण को ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति का वरदान दिया, जिससे यह शिवधाम आस्था और मोक्ष का विशेष केंद्र बन गया.

ऋषिकेश : ‘योग नगरी’ ऋषिकेश केवल गंगा, योग और साधना के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन और पौराणिक मंदिरों के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है. इन्हीं ऐतिहासिक मंदिरों में एक है लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर, जो भगवान शिव और भगवान लक्ष्मण से जुड़ी गहरी धार्मिक मान्यताओं का प्रतीक माना जाता है. यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था, तप और मोक्ष का विशेष केंद्र है. मान्यता है कि इसी पवित्र स्थल पर भगवान शिव ने लक्ष्मण को दर्शन दिए थे, जिसके बाद यह मंदिर लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

महंत रामेश्वर गिरी ने Bharat.one को बताया कि लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा हुआ बताया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंका युद्ध के दौरान भगवान लक्ष्मण ने रावण के पुत्र मेघनाथ का वध किया था. उस समय मेघनाथ अपनी कुल देवी की पूजा में लीन था और उसके पास कोई शस्त्र नहीं था. इसी कारण भगवान लक्ष्मण को ब्रह्महत्या का दोष लगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दोष के कारण उन्हें राजयक्ष्मा रोग भी हो गया था. इस पाप और रोग से मुक्ति पाने के लिए भगवान लक्ष्मण ऋषिकेश आए थे, जिसे तप और मोक्ष की भूमि माना जाता है.

क्या है इस मंदिर की मान्यता?
कहा जाता है कि ऋषिकेश पहुंचकर भगवान लक्ष्मण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या आरंभ की. उन्होंने इसी स्थान पर रेत से 12 ज्योतिर्लिंगों का निर्माण किया और लगातार वर्षों तक शिव भक्ति में लीन रहे. मान्यताओं के अनुसार, भगवान लक्ष्मण ने लगभग 212 वर्षों तक घोर तप किया. उनकी सच्ची भक्ति और कठिन तप से प्रसन्न होकर अंततः भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति का वरदान प्रदान किया. इसी चमत्कारी घटना के बाद इस स्थल को लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा.

सावन और महाशिवरात्रि में होता है विशेष आयोजन
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर ऋषिकेश के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है. यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा करने आते हैं. विशेष रूप से सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में भव्य आयोजन किए जाते हैं. दूर दूर से आए भक्त यहां आकर शिव कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं.

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mritunjay baghel

मीडिया क्षेत्र में पांच वर्ष से अधिक समय से सक्रिय हूं और वर्तमान में News-18 हिंदी से जुड़ा हूं. मैने पत्रकारिता की शुरुआत 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से की. इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड चुनाव में ग्राउंड…और पढ़ें

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