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वन काली मां की महिमा! 1860 से खुले आसमान के नीचे हैं विराजमान, अद्भुत है कहानी

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धनबाद. धनबाद के गोविंदपुर में स्थित मां वन काली मंदिर, जिसे लोग रक्षा काली और श्मशान काली के नाम से भी जानते हैं. भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस मंदिर का प्राचीन इतिहास 1860 से जुड़ा हुआ है. यह तब से भक्तों की सेवा कर रहा है. भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में मांगी गई मन्नत कभी विफल नहीं होती. मां काली अपने भक्तों की हर मनोकामना जरूर पूरी करती हैं.

खुद ही गिर जाती है छत, खुले में रहती है मां

मंदिर के पुजारी सोनथ ठाकुर ने Bharat.one से बातचीत करते हुए बताया कि यह मंदिर अति प्राचीन है और इसके छत की अनोखी कथा लोगों के बीच और भी श्रद्धा का कारण बनती है. पुजारी ने बताया कि कई बार इस मंदिर का छत ढलाई करने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार रात के समय छत खुद ही गिर जाती है. उनका कहना है कि मां वन काली खुले में, वन में ही रहना चाहती हैं. यही कारण है कि मंदिर का छत हमेशा खुला रहता है. इस अद्वितीय घटना ने मंदिर को भक्तों के बीच और भी प्रतिष्ठित बना दिया है.  और लोग इसे चमत्कार के रूप में देखते हैं.

मां काली के प्रति भक्तों का अटूट विश्वास इस मंदिर की महिमा को और बढ़ाता है. यहां पूजा करने के लिए न केवल धनबाद बल्कि अन्य राज्यों से भी लोग आते हैं. भक्तों का मानना है कि जो भी यहां मनोकामना मांगता है, वह जरूर पूरी होती है. इस मंदिर का विशेष महत्व इस बात में है कि यह भक्तों की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बना हुआ है. पुजारी ठाकुर ने यह भी बताया कि मंदिर के प्रति लोगों की बढ़ती श्रद्धा के बावजूद मंदिर का स्वरूप वैसा ही बना हुआ है. जैसा कि वर्षों पहले था. खुले आसमान के नीचे स्थित यह मंदिर वन में स्थित होने के कारण और भी अद्वितीय प्रतीत होता है. यहां आने वाले भक्तों के लिए यह एक आध्यात्मिक अनुभव है.

FIRST PUBLISHED : September 8, 2024, 18:21 IST

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