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Vivah Panchami 2025 : विवाह पंचमी का शास्त्रों में विशेष महत्व है. इस दिन केले के पेड़ की पूजा की जाती है, जो विशेष रूप से संतान व विवाह से जुड़ी सुख-समृद्धि और समृद्ध पारिवारिक जीवन के लिए की जाती है. उज्जैन के आचार्य ने इसको लेकर कई सारे बाते बताई हैं. साथ ही इसकी विधि और महत्व के बारे में बताया है.
उज्जैन. हर वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है. धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी पावन दिन मिथिला नगरी में श्रीराम ने स्वयंवर में विजय प्राप्त कर माता जानकी से विवाह किया था. यही कारण है कि यह तिथि दांपत्य जीवन की मंगलता और दिव्य प्रेम का प्रतीक मानी जाती है.इस शुभ अवसर पर भगवान श्रीराम और माता सीता की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है. मान्यता है कि इस दिन की गई उपासना से न केवल सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है, बल्कि जीवन के रुके हुए कार्य भी सहजता से सिद्ध हो जाते हैं.
विवाह पंचमी से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण परंपरा है. केले के पेड़ की पूजा, शास्त्रों में इसे अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है. कहा जाता है कि इस पूजा से वैवाहिक जीवन में सौहार्द बढ़ता है, संतान प्राप्ति का योग मजबूत होता है और घर-परिवार में समृद्धि का वास होता है. आइए उज्जैन के आचार्य पंडित आनंद भारद्वाज से जानते है कि उन्होंने केले के पेड़ की पूजा के धार्मिक महत्व और विधि.
कल मनाई जाएगी विवाह पंचमी
वैदिक पंचांग के अनुसार, विवाह पंचमी की शुरुआत, मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी तिथि 24 नवंबर को रात 9 बजकर 22 मिनट पर शुरू होगी. इस तिथि का समापन 25 नवंबर को रात 10 बजकर 56 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार इस बार विवाह पंचमी 25 नवंबर दिन मंगलवार को है.
केले के पेड़ की पूजा
विवाह पंचमी के दिन केले के पेड़ का विशेष महत्व होता है. ज्योतिष के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को गुरु से संबंधित दोष है, तो वह केले के पेड़ की पूजा करने से दूर हो जाता है. देवताओं के गुरु यानी बृहस्पति को विवाह, संतान और धर्म का जानकार माना जाता है. ऐसे में जिनके विवाह या संतान प्राप्ति में देरी हो रही है, उन्हें इस तिथि पर केले के पेड़ की पूजा करनी चाहिए.
जानले केले के पेड़ की पूजा विधि
विवाह पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इसके बाद पीले वस्त्र पहनकर केले के पेड़ पर पीली रस्सी बांधें. हल्दी-चंदन के साथ फूल चढ़ाने के बाद धूप और घी का दीपक जलाएं.भगवान राम के मंत्रों का जाप करें और श्रीराम भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं. केले के पेड़ की पूजा करते समय लक्ष्मीनारायण का ध्यान करें. इसके बाद अक्षदा, पंचामृत, सुपारी, लौंग, इलायची, दीपक जैसी चीजें चढ़ाएं.फिर केले के पेड़ की 21 बार परिक्रमा करें और केले के पेड़ के सामने अपनी विवाह संबंधी मनोकामना करें.

Anuj Singh serves as a Content Writer for News18MPCG (Digital), bringing over Two and Half Years of expertise in digital journalism. His writing focuses on hyperlocal issues, Political, crime, Astrology. He has…और पढ़ें
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

















