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वृंदावन रसिक संत प्रेमानंद महाराज की सीख- भगवान को अपना मानो… तो भारी दुखों में भी आनंद बना रहेगा

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Sant Premanand Ji Maharaj: वर्तमान में सबसे ज्यादा चर्चित रहने वाले साधु-संतों में प्रेमानंद महाराज का भी नाम शामिल है. उन्होंने अपनी मधुर वाणी और भक्तिमय जीवन से लाखों लोगों को प्रेरित किया है. उनके प्रवचन काफी प्रेरणादायक होते हैं. इसी क्रम में संत प्रेमानंद जी ने अपने प्रवचन में जीवन में आनंद लाने का तरीका बताया.

प्रेमानंद महाराज की सीख- भगवान को अपना मानो...भारी दुखों में भी आनंद बना रहेगादुखों में भी खुश रहने को लेकर वृंदावन रसिक संत प्रेमानंद महाराज की सीख.

Sant Premanand Ji Maharaj: भारत हमेशा से साधु-संतों की भूमि रहा है. उन्होंने आध्यात्मिक मार्गदर्शन, सामाजिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई है. वर्तमान में सबसे ज्यादा चर्चित रहने वाले साधु-संतों में प्रेमानंद महाराज का भी नाम शामिल है. उनकी लोकप्रियता देश-विदेश तक फैली है. उन्होंने अपनी मधुर वाणी और भक्तिमय जीवन से लाखों लोगों को प्रेरित किया है. उनके प्रवचन काफी प्रेरणादायक होते हैं. प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं. इसी क्रम में संत प्रेमानंद जी ने अपने प्रवचन में जीवन में आनंद लाने का तरीका बताया. जानिए आखिर वृंदावन से रसिक संत प्रेमानंद महाराज जी ने भक्तों को क्या सीख दी-

जीवन में आनंद कैसे लाएं?

इस सवाल पर वृंदावन से रसिक संत प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को एक लाइन में सीख दी. कहा- निरंतर अभ्यास करो और भगवान को अपना मानो, तो भारी दुखों में भी आनंद बना रहता है. बिना इसके, दुखों से निपट पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. बता दें कि, मान पाने की इच्छा मनुष्य को प्रभु से दूर ले जाती है. भक्त का सबसे बड़ा दुख भगवान के विस्मरण का होता है.

भगवान का चिंतन करने से क्या होगा?

एक अन्य वीडियो में प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, चिंता चिता के समान होती है, लेकिन लोग फिर भी इससे निकल नहीं पाते हैं. उनका कहना है कि, अगर दिमाग खाली हो तो गंदगी ही भरेगी, इसलिए भगवान का चिंतन जरूरी है. क्योंकि, जब हमारे दिमाग में भगवती का चिंतन होगा तो हम चिंता कर ही नहीं पाएंगे.

संकट में प्रेमानंद जी का भी भगवान ने दिया साथ

प्रेमानंद महाराज जी आगे एक उदाहरण देते हुए बताता है कि एक बार आदमी नशे में मोटरसाइकिल चलाते हुए आ रहा था और हम मस्ती से जा रहे है ठाकुर जी के दर्शन करने के लिए जा रहे थे तो हमारे मुख से निकला राधा वह मोटरसाइकिल सीधा हमारे पैरों में आकर रुकी गई. इसका मतलब है कि, कभी भी संकट विपत्ति पर जब केवल भगवान का भरोसा होता है और केवल भगवान की पुकार होती है तो एक ही सेकंड में उसका परिणाम देखने को मिलता है.

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Lalit Kumar

ललित कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 साल से अधिक का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी. इस दौरान वे मेडिकल, एजुकेशन और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को कवर किया करते थे. पत्रकारिता क…और पढ़ें

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