Home Uncategorized शनिवार का प्रदोष व्रत दिलाएगा शनि की साढ़ेसाती से राहत, इस बार...

शनिवार का प्रदोष व्रत दिलाएगा शनि की साढ़ेसाती से राहत, इस बार फरवरी में पड़ेगा शनि-प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि

0
1


Last Updated:

Shani Pradosh Vrat: इस बार 14 फरवरी को शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा. देवघर के ज्योतिषाचार्य का कहना है कि इस दिन व्रत करना और विधि-विधान से पूजा करना शनि दोष से पीड़ित लोगों के लिए लाभकारी होता है. शिव और शनि दोनों की पूजा से जीवन की समस्याएं खत्म होती हैं.

ख़बरें फटाफट

देवघर. भगवान शिव को समर्पित व्रतों में प्रदोष व्रत को अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की संध्या को प्रदोष काल कहा जाता है. इस समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव कृपा सहज ही प्राप्त होती है. शिवपुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि प्रदोष व्रत करने वाले जातक के जीवन से कष्ट, रोग, शोक और भय का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

शनि प्रदोष व्रत कब
विशेष रूप से जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तब इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. यह व्रत ज्योतिष की दृष्टि से बेहद खास माना जाता है, क्योंकि शनिवार शनि देव का दिन होता है और भगवान शिव को शनि देव का गुरु कहा गया है. ऐसे में इस दिन शिव और शनि दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है. तो आइए देवघर के ज्योतिषाचार्य से जानते हैं कि शनि प्रदोष व्रत कब है और इस दिन शनि की कुदृष्टि से बचने के लिए क्या कुछ उपाय करना चाहिए.

क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने Bharat.one के संवाददाता से बातचीत में बताया कि 14 फरवरी का शनि प्रदोष व्रत विशेष रूप से शनि दोष से पीड़ित जातकों के लिए अत्यंत लाभकारी है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है, उन्हें इस दिन विशेष सावधानी और श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए. शनि प्रदोष व्रत के दिन सुबह से ही व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन सात्विक आहार ग्रहण करें और क्रोध, झूठ व नकारात्मक विचारों से दूर रहें. संध्या काल में प्रदोष समय के दौरान भगवान शिव की षोडशोपचार विधि से पूजा करना अत्यंत शुभ रहता है.

इस विधि से करें पूजा
पूजा विधि के बारे में उन्होंने बताया कि सबसे पहले शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करें, इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें. फिर बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक के फूल और सफेद पुष्प अर्पित करें. “ॐ नमः शिवाय” और “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप करें.

भगवान शिव की पूजा के बाद करें यह काम
शिव पूजा के पश्चात शनि देव की विशेष आराधना करनी चाहिए. शनि देव पर सरसों के तेल से अभिषेक करें और तिल के तेल का दीपक जलाएं. साथ ही “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस उपाय से शनि देव की कठोर दृष्टि शांत होती है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि शनि के कारण जीवन में जो समस्याएं आती हैं, जैसे आर्थिक तंगी, नौकरी या व्यापार में रुकावट, बार-बार दुर्घटना, मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां, वे शनि प्रदोष व्रत की सही विधि से पूजा करने पर धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं.

About the Author

authorimg

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए Bharat.one Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

homedharm

शनिवार का प्रदोष व्रत दिलाएगा शनि की साढ़ेसाती से राहत, जान लें पूजा की विधि

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here