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शेषनाग, श्री यंत्र और 130 फीट ऊंचाई! गुजरात के इस मंदिर में छिपा है आध्यात्म का रहस्य

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Shri Merulaxmi Mata Mandir:सूरत के पालनपुर पाटिया में स्थित मेरुलक्ष्मी माता का मंदिर 130 फीट ऊंचा है और मेरुपृष्ठ श्री यंत्र पर आधारित है. 1978 में स्थापित यह मंदिर आकर्षण का केंद्र है.

शेषनाग, श्री यंत्र और 130 फीट ऊंचाई! इस मंदिर में छिपा है आध्यात्म का रहस्य

मेरुलक्ष्मी माता मंदिर सूरत

सूरत: प्राचीन मंदिरों और इमारतों की अमूल्य धरोहर सूरत शहर में संरक्षित है. यहां कई ऐसे मंदिर हैं जिनके प्रति लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. हर मंदिर का कोई न कोई इतिहास और उससे जुड़ी रोचक कथा होती है. आज हम सूरत शहर के एक ऐसे मंदिर की बात कर रहे हैं जो एक यंत्र पर आधारित है. सुनकर हैरानी होगी, लेकिन सूरत के पालनपुर पाटिया क्षेत्र में माता का ऐसा मंदिर है जहां माता 130 फीट ऊंचाई पर विराजमान हैं.

आकर्षण का केंद्र बना राजराजेश्वरी मंदिर
पालनपुर पाटिया क्षेत्र में स्थित मेरुलक्ष्मी माता का मंदिर सूरत का एकमात्र ऐसा स्थान है जो मेरुपृष्ठ श्री यंत्र पर आधारित है. वर्ष 1978 में स्थापित यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि अपनी अनोखी बनावट के कारण भी आकर्षण का केंद्र बन गया है. इस मंदिर की आकृति और रचनात्मक दृष्टिकोण भी अनोखे हैं.

शास्त्रों में भू-पृष्ठ, उभय-पृष्ठ और मेरु-पृष्ठ तीन प्रकार के श्री यंत्र का उल्लेख है. हालांकि, ऐसा मंदिर शहर में एकमात्र श्री मेरुलक्ष्मी माता का मंदिर है. इस मंदिर को राजराजेश्वरी माता के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर में त्रिपुरा सुंदरी स्वरूप में माता 130 फीट ऊँचाई पर विराजमान हैं. सबसे ऊपर शिखर और बीच में लक्ष्मी माता को विराजमान किया गया है और सबसे नीचे पृथ्वी का भार उठाने वाले शेषनाग की स्थापना की गई है.

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श्री चक्र का आवरण नौ चक्रों का है
त्रिपुरा सुंदरी स्वरूप में कमल में विराजमान माता के दर्शन के लिए आए भक्त अपनी परिक्रमा आसानी से कर सकें, इसके लिए तीन मंजिल का गोलाकार परिक्रमा पथ भी बनाया गया है. यह मेरुपृष्ठ श्री चक्र की अधिष्ठात्री राजराजेश्वरी देवी हैं. यंत्र के पहले चौकोर आवरण के चार द्वार हैं. उत्तर में देव कुबेर, पूर्व में इंद्र, दक्षिण में यम, पश्चिम में वरुण देव हैं. श्री चक्र का आवरण नौ चक्रों का है. निज मंदिर की पहली मंजिल पर अंदर की त्रिमूर्ति 108 पंखुड़ियों वाले कमल में है. मंदिर में विराजमान तीन देवियों का स्वरूप एकरूप में होता है, जिसे त्रिपुरा सुंदरी देवियां कहा जाता है.

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