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संतान सुख का आशीर्वाद देने वाला अहोई अष्टमी व्रत, उज्जैन के ज्योतिषी से जानें तारीख-शुभ मुहूर्त और महत्व

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Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी पर इस बार चार शुभ योग बन रहे हैं. अहोई अष्टमी के दिन परिघ योग, रवि योग, शिव योग और पुनर्वसु नक्षत्र है, इसलिए इस दिन व्रत रख पूजन का महत्व और भी बढ़ जाता है.

उज्जैन. हिंदू धर्म में हर तिथि और हर व्रत का अलग-अलग महत्व है. भारतीय पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन अहोई माता का व्रत रखा जाता है. इस दिन सभी मांओं को अपने पुत्र की लंबी उम्र की कामना के लिए या संतान इच्छुक महिलाओं को संतान प्राप्ति के लिए व्रत अवश्य रखना चाहिए. इस दिन अहोई माता की भक्ति और तारों को अर्घ्य देने की परंपरा घर में खुशियों का संदेश लाती है. अहोई अष्टमी का व्रत करवाचौथ के बाद मनाया जाता है. इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं. मध्य प्रदेश के उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं, इस बार यह व्रत कब रखा जाएगा.

आचार्य आनंद भारद्वाज ने Bharat.one को बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल अष्टमी तिथि 13 अक्तूबर को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट के लगभग शुरू होगी. अष्टमी तिथि 14 अक्तूबर को दोपहर 1 बजकर 09 मिनट के लगभग समाप्त होगी. अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त शाम 5:53 बजे से शाम 7:08 बजे तक रहेगा. पंचांग के अनुसार, इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा.

अहोई अष्टमी पर बन रहे शुभ योग
उन्होंने बताया कि इस बार अहोई अष्टमी पर चार शुभ योग बन रहे हैं. अहोई अष्टमी के दिन रवि योग, परिघ योग, शिव योग और पुनर्वसु नक्षत्र है, इसलिए इस दिन व्रत रखकर पूजन-पाठ का महत्व और बढ़ जाता है.

अहोई देवी की पूजा का महत्व
अहोई अष्टमी दीवाली से पहले और करवाचौथ के बाद आती है. इस दिन माताएं निर्जल व्रत का संकल्प लेती हैं. शाम के समय महिलाएं अहोई देवी की पूजा-अर्चना करती हैं. कई जगहों पर तारों के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है. मान्यता है कि निःसंतान महिलाओं द्वारा इस व्रत को करने से माता अहोई के आशीर्वाद से उन्हें भी संतान सुख प्राप्त होता है.

अहोई अष्टमी पर शुभ मुहूर्त
अहोई अष्टमी को शाम के समय में तारों को देखकर पारण किया जाता है. इस बार अहोई अष्टमी पर तारों को देखने का विशेष महत्व है. अहोई अष्टमी पर तारों को देखने का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 17 मिनट पर है. जो माताएं चंद्रोदय होने के बाद अहोई अष्टमी व्रत का पारण करती हैं, उनको चांद के निकलने के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी होगी क्योंकि अहोई अष्टमी की रात 11 बजकर 20 मिनट पर चंद्रोदय होगा.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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संतान का सुख देने वाला अहोई अष्टमी व्रत, जानें तारीख-शुभ मुहूर्त और महत्व

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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