शुभम मरमट / उज्जैन: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावशाली व्रत माना जाता है. खासतौर पर पौष मास का अंतिम प्रदोष व्रत बेहद फलदायी माना गया है. मान्यता है कि इस दिन अगर सच्चे मन और सही विधि से पूजा-अर्चना की जाए, तो जीवन से दुख, दरिद्रता और आर्थिक परेशानियां दूर हो जाती हैं.
उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज बताते हैं कि पौष मास साल का अंतिम मास होता है और इस दौरान पड़ने वाला अंतिम प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए बहुत खास होता है. इस दिन शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें अर्पित करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं.
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं और इस समय जो भक्त उनकी पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह व्रत न सिर्फ आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता के द्वार भी खोलता है.
कब रखा जाएगा पौष प्रदोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत: 16 दिसंबर 2025, रात 11:57 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 18 दिसंबर 2025, रात 2:32 बजे
इस आधार पर प्रदोष व्रत 17 दिसंबर 2025 (बुधवार) को रखा जाएगा.
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त:
शाम 6:04 बजे से रात 8:41 बजे तक
साल के आखिरी प्रदोष पर जरूर करें ये 3 खास उपाय
तिल से करें शिवलिंग का अभिषेक
पौष मास के अंतिम प्रदोष व्रत पर शिवलिंग पर तिल अर्पित करें या तिल मिश्रित जल से अभिषेक करें. मान्यता है कि इससे व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.
गेहूं और धतूरे से पाएं संतान सुख
दिसंबर के अंतिम प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर गेहूं और धतूरा अर्पित करें. इस दौरान महादेव से सुख-शांति और संतान सुख की कामना करें. मान्यता है कि यह उपाय विशेष रूप से फलदायी होता है और शिवजी की कृपा बनी रहती है.
पैसों की तंगी दूर करने का अचूक उपाय
अगर लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे हैं, तो पौष प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर कच्चे चावल अर्पित करें. मान्यता है कि इससे धन लाभ के योग बनते हैं और घर में कभी धन की कमी नहीं रहती.
क्यों खास है पौष प्रदोष व्रत?
आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, यह दिन भक्ति, श्रद्धा और शिव कृपा का अद्भुत संगम है. जो भक्त इस दिन नियमपूर्वक व्रत रखकर शिव पूजा करता है, उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं.
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