Home Uncategorized साल 2026 में बरसेगी शनिदेव की कृपा! शनि शिंगणापुर नहीं जा पा...

साल 2026 में बरसेगी शनिदेव की कृपा! शनि शिंगणापुर नहीं जा पा रहे, तो आ जाएं एमपी के इस प्रसिद्ध मंदिर

0
0


खरगोन. नया साल 2026 जल्द दस्तक देने वाला है. साल बदलते समय हर कोई चाहता है कि बीते साल की परेशानियां पीछे छूट जाएं और आने वाला साल सुख, शांति और सफलता लेकर आए. खासकर वे लोग जो शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा से गुजर रहे हैं, नए साल की शुरुआत शनिदेव की कृपा के साथ करना चाहते हैं. आमतौर पर ऐसे श्रद्धालु महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शनि शिंगणापुर जाने की योजना बनाते हैं लेकिन अगर समय या बजट आड़े आ रहा है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है. मध्य प्रदेश के खरगोन में ही एक ऐसा पवित्र स्थल मौजूद है, जहां दर्शन मात्र से ही शनिदेव की कृपा मिलने की मान्यता है.

खरगोन शहर में कुंदा नदी के तट पर स्थित प्राचीन सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि ज्योतिष शास्त्र के अद्भुत सिद्धांतों पर आधारित एक अनोखा मंदिर भी है. यह देश के ऐसे गिने-चुने मंदिरों में से एक माना जाता है, जिसकी रचना 7 दिन, 12 राशियों, 12 महीनों और 9 ग्रहों के खगोलीय गणित के अनुसार की गई है. सूर्य प्रधान होने के कारण यहां मकर संक्रांति और वर्ष परिवर्तन के समय विशेष भीड़ देखने को मिलती है. नए साल से पहले यहां दर्शन करने के लिए प्रदेशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.

बनने लगेंगे रुके हुए काम
इस नवग्रह मंदिर में शनिदेव मूर्ति रूप में विराजमान हैं. भक्तों का विश्वास है कि यहां शनिदेव से जुड़ी वस्तुओं की पोटली चढ़ाने, दीपक जलाने और सच्चे मन से प्रार्थना करने से शनि दोष का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है. शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कारण जो रुकावटें कामकाज, नौकरी, व्यापार या पारिवारिक जीवन में आती हैं, उनसे राहत मिलने लगती है.

शनि दोष होने पर क्या चढ़ाएं?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, नया साल शुरू होने से पहले शनिदेव का पूजन करना विशेष फलदायी माना जाता है. शनिदेव कर्म के देवता हैं, जो व्यक्ति के अच्छे–बुरे कर्मों के अनुसार फल देते हैं. अगर नए साल की शुरुआत से पहले काले तिल, तिल का तेल, काला कपड़ा, लोहा या उड़द जैसी वस्तुओं का दान किया जाए और शनि मंत्रों का जाप किया जाए, तो आने वाला पूरा साल शनिदेव की कृपा में बीतता है. शनि की चाल भले ही धीमी मानी जाती हो लेकिन उनकी कृपा से जीवन की अटकी हुई राहें खुलने लगती हैं.

शनिदेव से क्यों डरते हैं लोग?
आचार्य लोकेश जागीरदार Bharat.one को बताते हैं कि शनिदेव न्याय के देवता हैं. वह देर से फल जरूर देते हैं लेकिन न्यायपूर्ण फल देते हैं. साढ़ेसाती, महादशा या ढैय्या के दौरान अगर व्यक्ति धैर्य रखे और नियमित रूप से शनिदेव की आराधना करे, तो रुकावटें कम होने लगती हैं. नए साल से पहले किया गया पूजन पूरे साल सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखता है. जिन लोगों की कुंडली में शनि की महादशा या साढ़ेसाती चल रही है और जिनके काम लंबे समय से अटके हुए हैं, उन्हें साल के अंतिम दिनों में शनिदेव का अभिषेक और दान अवश्य करना चाहिए.

नए साल पर बना लीजिए प्लान
शनिदेव के पूजन से मानसिक तनाव कम होता है और नए साल की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ होती है. अगर आप भी चाहते हैं कि नया साल 2026 बीते साल की परेशानियों से मुक्त होकर शुरू हो, तो दूर जाने की बजाय खरगोन के इस प्राचीन नवग्रह मंदिर में शनिदेव के दर्शन कर सकते हैं. यहां की गई प्रार्थना आपके नए साल को सुखद और सफल बना सकती है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here