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नए साल पर सीतामढ़ी और शिवहर के ये पांच प्रसिद्ध शिव मंदिरों का दर्शन जरूर करें. इन मंदिरों में स्थापित शिवलिंगों की अपनी अलग पौराणिक कथा और महत्व है

नए साल पर अगर आप भगवान शिव के दर्शन और जल अर्पित करना चाहते हैं. सीतामढ़ी और शिवहर के पांच प्रसिद्ध शिव मंदिरों का दर्शन जरूर करें. इन मंदिरों में स्थापित शिवलिंगों की अपनी अलग पौराणिक कथा और महत्व है. नए साल, बसंत पंचमी और अन्य शुभ अवसरों पर हजारों श्रद्धालु इन मंदिरों में पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं.

हलेश्वर स्थान, गिरमिसानी
गिरमिसानी स्थित हलेश्वर स्थान का शिवलिंग रामेश्वरम से भी प्राचीन माना जाता है. इसे राजा जनक ने स्थापित किया था। रामायणकालीन यह मंदिर नए साल पर नेपाल सीमा तक से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.हजारों लोग यहां जल अर्पित कर आस्था का अनुभव करते हैं. भोलेनाथ की कृपा पाते हैं.

भुवनेश्वर महादेव, देकुली धाम
महाभारत कालीन भुवनेश्वर महादेव मंदिर देकुली धाम में स्थित है. यह मंदिर आसपास के जिलों और नेपाल से आने वाले श्रद्धालुओं का केंद्र है. नए साल पर यहाँ हजारों भक्त जल अर्पित करते हैं. सीतामढ़ी, शिवहर और मोतिहारी के लोग भी इस दिव्य स्थल पर आस्था के साथ दर्शन करने पहुंचते हैं.
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दमामी मठ, बेलसंड
बेलसंड प्रखंड के दमामी गांव में स्थित ईशाननाथ मंदिर को दमामी मठ भी कहते हैं. बाबा ईशाननाथ महादेव का स्वयंभू शिवलिंग यहां स्थापित है। नए साल पर श्रद्धालु आस्था से जल अर्पित करते हैं.यह प्राचीन मंदिर स्थानीय लोगों और दूर-दूर से आए भक्तों के लिए भक्ति और शांति का केंद्र है.

बाल्मिकेश्वर नाथ महादेव, सुरसंड
सुरसंड में बाल्मिकेश्वर नाथ महादेव मंदिर प्राचीन शिवधाम है. मान्यता है कि इसे ऋषि वाल्मीकि ने स्थापित किया था. भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित यह मंदिर नए साल पर हजारों भक्तों की आस्था का केंद्र बनता है। यहां लोग जल अर्पित कर भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं.

नागेश्वर नाथ शिव मंदिर, पुपरी
पुपरी का नागेश्वर नाथ शिव मंदिर स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है.नए साल, सावन, महाशिवरात्रि और रविवार को यह मंदिर श्रद्धालुओं से भरा रहता है. भक्त आस्था से जल अर्पित करते हैं और भगवान शिव की पूजा करते हैं. यह पुपरी का प्रमुख धार्मिक स्थल है और आस्था का प्रमुख केंद्र भी है.

















