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सूर्य-शनि दोष से बनते हैं पिता-पुत्र दुश्मन! ज्योतिषीय से जानिए समाधान

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Father Son Relationship Astrology: ज्योतिष आचार्य संतोष कुमार चौबे (रांची यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट) बताते हैं कि कुंडली का नवम भाव (9वां घर) पिता से जुड़ा होता है. अगर इस भाव में अशुभ ग्रह स्थित हों, तो पि…और पढ़ें

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अगर कुंडली के नवम भाव में सूर्य के साथ यह एक ग्रह आकर बैठा, तो फिर बच्चा बन जाता

हाइलाइट्स

  • पिता-पुत्र संबंध में कुंडली का नवम भाव महत्वपूर्ण है.
  • सूर्य-राहु युति से पिता का स्वभाव कठोर हो सकता है.
  • सूर्य को जल अर्पित करने से संबंधों में सुधार हो सकता है.

शिखा श्रेया/रांची: मां और बच्चे के बाद अगर कोई सबसे खास रिश्ता माना जाता है, तो वह पिता और संतान का होता है. यह निस्वार्थ प्रेम, त्याग और अनुशासन से भरा संबंध होता है. लेकिन कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि पिता और संतान के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं. कुछ बच्चे अपने पिता को अपना दुश्मन समझने लगते हैं, तो कुछ पिता अपनी संतान की जिम्मेदारी से दूर भागते हैं. क्या यह सिर्फ पारिवारिक परिस्थितियों का परिणाम है, या इसके पीछे ज्योतिषीय कारण भी हो सकते हैं?

ज्योतिषाचार्य संतोष कुमार चौबे (रांची यूनिवर्सिटी से ज्योतिष शास्त्र में गोल्ड मेडलिस्ट) बताते हैं कि किसी व्यक्ति की कुंडली का नवम भाव (9वां घर) पिता के साथ संबंध को दर्शाता है. यदि इस भाव में शुभ ग्रह होते हैं, तो पिता-पुत्र का रिश्ता मजबूत होता है, लेकिन अगर अशुभ ग्रहों का प्रभाव हो, तो इस रिश्ते में तनाव आ सकता है.

कैसे ग्रह बिगाड़ते हैं पिता-पुत्र का संबंध?
ज्योतिष के अनुसार, कुछ खास ग्रह स्थितियां पिता और संतान के रिश्ते को कमजोर बना सकती हैं.

सूर्य-राहु युति: अगर कुंडली में सूर्य और राहु एक साथ हों, तो पिता का स्वभाव कठोर हो सकता है. ऐसे पिता संतान की भावनाओं को नहीं समझते, जिससे संबंधों में कड़वाहट आ सकती है.

सूर्य-शनि का संयोग: शनि ग्रह अनुशासन और कर्म का कारक है. यदि सूर्य और शनि एक ही भाव में हों, तो यह पिता और पुत्र के बीच अहंकार और टकराव को जन्म देता है.

नवम भाव में शनि की अशुभ स्थिति: यदि शनि नवम भाव में हो और कमजोर अवस्था में हो, तो संतान अपने पिता के प्रति कृतज्ञता महसूस नहीं करती. वह पिता की हर बात का विरोध कर सकती है.

पितृ दोष: कुछ विशेष योगों में यदि नवम भाव पर पितृ दोष हो, तो संतान पिता से दूर हो जाती है और दोनों के बीच बातचीत तक बंद हो सकती है.

पिता-पुत्र संबंध सुधारने के ज्योतिषीय उपाय
अगर कुंडली में ऐसे दोष हों, तो कुछ विशेष उपाय अपनाकर पिता और संतान के रिश्ते में मधुरता लाई जा सकती है.
सूर्य को जल अर्पित करें – प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल डालकर सूर्य देव को अर्पित करें. इससे पिता के साथ संबंधों में सुधार होगा.
शनिवार को दान करें – काले तिल, उड़द दाल, लोहे की वस्तुएं और सरसों के तेल का दान करने से शनि दोष कम होता है.

मंत्र जाप करें

“ॐ सूर्याय नमः” का 108 बार जाप करें.
“ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें.
पितृ दोष निवारण पूजा करें – अगर कुंडली में पितृ दोष है, तो अमावस्या या पितृ पक्ष में पितरों के नाम तर्पण करें.
संयम बनाए रखें – चाहे पिता का व्यवहार कैसा भी हो, संतान को उन्हें सम्मान देना चाहिए. अगर पिता कठोर भी हों, तो भी उन्हें अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं होना चाहिए.

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क्या ग्रहों की दशा बिगाड़ सकती है पिता-पुत्र का रिश्ता? जानिए ज्योतिषीय कारण

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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