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हजारीबाग में तांत्रिकों का अनोखा संगम, तंत्र की माता सरस्वती की विशेष पूजा में डोम राजा ने लगाया भोग

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Hazaribagh News: हजारीबाग शमशान काली मंदिर में तांत्रिकों द्वारा गोपनीय रूप से मां मातंगी की पूजा की जा रही है. मां मातंगी को तांत्रिकों की ज्ञान की देवी माना जाता है.  इस विशेष पूजा को केवल तंत्र विद्या में निपुण साधक ही कर सकते हैं

विद्या, ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा पूरे जिले में श्रद्धा और उत्साह के साथ की जा रही है. जगह-जगह पंडालों में मां की प्रतिमा स्थापित कर भक्त पूजा-अर्चना में लीन हैं. विद्यार्थी मां सरस्वती से ज्ञान और सफलता का आशीर्वाद मांग रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, शहर के शमशान घाट स्थित काली मंदिर में एक अलग ही रूप में ज्ञान की देवी की पूजा हो रही है, जहां तांत्रिक देवी मां मातंगी की आराधना कर रहे हैं.

हजारीबाग शमशान काली मंदिर में तांत्रिकों द्वारा गोपनीय रूप से मां मातंगी की पूजा की जा रही है. मां मातंगी को तांत्रिकों की ज्ञान की देवी माना जाता है.  इस विशेष पूजा को केवल तंत्र विद्या में निपुण साधक ही कर सकते हैं. आम लोग इस पूजा में शामिल नहीं होते, बल्कि यह पूरी तरह तांत्रिक परंपराओं और नियमों के अनुसार संपन्न की जाती है.

हजारीबाग में लगा तांत्रिकों का जमावड़ा
तंत्र विद्या साधक बिट्टू बाबा ने बताया कि जहां एक ओर पूरे देश में सरस्वती पूजा की धूम रहती है, वहीं दूसरी ओर तांत्रिक समाज गुप्त रूप से मां मातंगी की पूजा करता है. हजारीबाग शमशान काली मंदिर में यह पूजा हर पांच साल में एक बार होती है. इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में मां मातंगी की प्रतिमा स्थापित की जाती है और विशेष विधि-विधान से पूजा की जाती है.मां मातंगी दस महाविद्याओं में नौवीं महाविद्या मानी जाती हैं. उनकी पूजा विशेष रूप से ज्ञान, वाणी, कला और तंत्र साधना के लिए की जाती है. तांत्रिक परंपरा के अनुसार इस पूजा में बलि की भी परंपरा है. पूजा पूरी तरह शास्त्रीय नियमों और तांत्रिक विधि के अनुसार की जाती है.

मां मातंगी की पूजा
चार भुजाओं वाली मां मातंगी के एक हाथ में खड़क, एक हाथ में मुंड, एक हाथ में कृपाण और एक हाथ में वीणा होती है. विशेष बात यह है कि माता के किसी भी हाथ में आशीर्वाद मुद्रा नहीं होती. तंत्र विद्या में यह मान्यता है कि मां मातंगी को भोग डोम राजा के हाथों से ही लगाया जाता है. इसी परंपरा के तहत शमशान से डोम राजा को मंदिर परिसर में बुलाया गया, जिन्होंने अपने हाथों से मां को भोग अर्पित किया.डोम राजा ने बताया कि मां मातंगी तांत्रिकों की सरस्वती हैं, जो उन्हें ज्ञान, बुद्धि और सिद्धि प्रदान करती हैं. पांच वर्षों में एक बार होने वाली यह पूजा हजारीबाग शमशान घाट मंदिर की विशेष पहचान बन चुकी है. यह झारखंड का पहला ऐसा मंदिर है, जहां मां मातंगी की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा की जाती है.

तंत्र की माता सरस्वती की पूजा
इस विशेष पूजा में बड़ी संख्या में तांत्रिक साधक मौजूद रहते हैं. जैसे ही लोगों को शमशान काली मंदिर में इस अनोखी पूजा की जानकारी मिलती है, कई श्रद्धालु इसे देखने के लिए पहुंच जाते हैं. एक भक्त ने बताया कि शहर में सरस्वती पूजा तो हर जगह हो रही है, लेकिन तांत्रिकों की सरस्वती पूजा कैसी होती है, यह देखने की जिज्ञासा उन्हें यहां खींच लाई. उन्होंने कहा कि पूजा बेहद भव्य और रहस्यमयी है और वे मां का आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं.आस्था और विश्वास के कई रूप होते हैं. शमशान में तांत्रिकों द्वारा ज्ञान की देवी मां मातंगी की पूजा भी उसी गहरे विश्वास और परंपरा का एक अनूठा उदाहरण है.

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हजारीबाग में तांत्रिकों का अनोखा संगम, तंत्र की माता सरस्वती की विशेष पूजा

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