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हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है यह मंदिर, दलित चेतना का भी जलाता है अलख

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इटावा के प्रसिद्ध कालिका मंदिर परिसर में एक ओर जहां मां काली विराजती हैं तो वहीं उसी आंगन में सैयद पीर बाबा का दरगाह भी है. यह मंदिर एकता और सौहार्द की मिसाल है. पीर बााबा के मजार पर चादर, कौड़ियां एवं बताशा चढ़ाया जाता है. मजार दुआ किए बिना किसी भक्त की मन्नत पूरी नहीं होती है. यहां श्रद्धालु अपनी मनौती मांगते हैं तथा कार्य पूर्ण होने पर प्रसाद चढ़ाते हैं.

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