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Ambala News: अंबाला के गांव हल्दरी में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की विशेष मान्यता है. यहां रात को खड़ाऊ की आवाज सुनाई देती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. विशेष रूप से, संतान सुख की प्राप्ति के लिए म…और पढ़ें
भगवान हनुमान जी का ऐसा मंदिर,रात के समय सुनाई देती है खड़ाऊ की आवाज, राम नाम का
हाइलाइट्स
- हनुमान जयंती पर भक्तों ने बूंदी और लड्डू का प्रसाद चढ़ाया.
- अंबाला के पंचमुखी हनुमानजी मंदिर में रात को खड़ाऊ की आवाज सुनाई देती है.
- मंदिर में सच्चे मन से की गई मनोकामना पूरी होती है.
अंबाला. देशभर में आज हनुमान जयंती धूमधाम से मनाई गयी, और लोग भगवान श्री हनुमान जी को बूंदी और लड्डू का प्रसाद चढ़ाए. इसी मौके पर हम आपको भगवान हनुमान जी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां रात को रुकने वाले भक्तों को खड़ाऊ की आवाज सुनाई देती है.
अंबाला जिले के साहा क्षेत्र के गांव हल्दरी में स्थित पंचमुखी हनुमानजी का यह मंदिर लगभग डेढ़ सौ साल पुराना है. इस मंदिर में “राम नाम का जाप करो” की आवाज सुनाई देती है, और यहां की आस्था और रहस्य से जुड़ी कई कथाएं हैं. मंदिर में आने वाले भक्तों का मानना है कि इस स्थान पर उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. हर मंगलवार को यहां पर 21 किलो आटे की रोड का महाभोग भगवान हनुमान जी को अर्पित किया जाता है, और लोग अपनी मनोकामनाएं भगवान बालाजी महराज से मांगते हैं.
ब्रह्म मुहूर्त में खड़ाऊ की आवाज
मंदिर के पुजारी विशाल शर्मा ने बताया कि यह मंदिर लगभग डेढ़ सौ साल से भी अधिक पुराना है, और यहां पर आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. उन्होंने कहा कि मंदिर की एक पुरानी मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति रात के समय यहां रुकता है तो उसे ब्रह्म मुहूर्त में खड़ाऊ की आवाज सुनाई देती है. यह आवाज पहले मंदिर के पुजारियों को सुनाई देती थी, जिससे अब यहां रात को रुकने की अनुमति नहीं दी जाती है.
आरती के समय की विशेष अनुभूति
विशाल शर्मा ने बताया कि जब भक्त इस मंदिर में बालाजी की आरती करते हैं तो उन्हें कभी अकेलेपन का एहसास नहीं होता, क्योंकि हमेशा बाहर से आवाजें सुनाई देती रहती हैं. मंदिर कमेटी के सदस्य पदम कुमार शास्त्री ने बताया कि जब बाबा राम किशनदासजी महाराज रामचरितमानस का पाठ करते थे, तो पन्ना खत्म होते ही अपने आप पलट जाता था.
मनोकामना की पूर्ति
इस मंदिर में सच्चे मन से की गई कोई भी मनोकामना पूरी होती है. विशेष रूप से, जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं होता, वे इस मंदिर में आकर अपनी मनोकामना मांगती हैं और उन्हें संतान प्राप्ति होती है. इस मंदिर की विशेष मान्यता और आस्था के कारण लोग दूर-दूर से यहां आते हैं.

















