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175 साल पुराना है राम जानकी का यह मंदिर, यहां की रक्षा करते हैं सांप, गजब की है मान्यता

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संजय कुमार/चंदौली: जिले के मुगलसराय के अलीनगर में स्थित राम जानकी मंदिर 175 वर्ष पुराना है. इस मंदिर की महिमा बहुत ही निराली है. इस मंदिर के आस पास 5 कुएं हैं. यहां एक पोखरा भी है, जिसका पानी गर्मी में भी नहीं सूखता है. इसका निर्माण हरदेव साह तथा उनकी पत्नी बतासी देवी के द्वारा कराया गया था.  स्थानीय निवासी ओम प्रकाश जायसवाल ने Bharat.one से बताया कि हरदेव शाह की कोई संतान नहीं थी. एक बार एक महात्मा यहां पहुंचे, तो उन्होंने उनसे यह प्रश्न किया कि उनकी कोई संतान नहीं है इसके लिए उन्हें क्या करना चाहिए? तब महात्मा जी ने उन्हें मंदिर पोखर और कुएं बनवाने का सुझाव दिया और कहा कि ऐसा करने से उनकी संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो जाएगी. इसके बाद हरदेव शाह ने पोखर और कुओं का निर्माण कराया पोखर के बीचो-बीच भी एक कुआं बनाया गया है, जिसके कारण पोखर का पानी सालों भर नहीं सूखता है.

वर्षों तक ख्याति बने रहने का दिया आशीर्वाद

जायसवाल बताते हैं कि हरदेव साह ने जब सब कुछ कर दिया फिर भी उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई, तो उन्होंने एक बार फिर महात्मा जी से यह सवाल किया, अब उन्हें संतान की प्राप्ति क्यों नहीं हो रही है? तब महात्मा जी ने कहा कि जिसके पास भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और माता सीता जैसी संतान हो उन्हें अब संतान की क्या जरूरत? जब तक यह मंदिर रहेगा, तब तक हरदेव साह की ख्याति भी रहेगी.

जायसवाल दंपति के बाद काशीनाथ जायसवाल ने की देखरेख

श्री जायसवाल बताते हैं कि उनके पिता काशीनाथ जायसवाल बतासी देवी के पौत्र लगते थे. हरदेव साह की मृत्यु के बाद बतासी देवी मंदिर पोखर आदि सब की देखरेख करती थी. अंत समय में बतासी देवी ने काशीनाथ जायसवाल के नाम एक वसीयत बनाई, जिसमें सारी संपत्ति और जिम्मेदारी उन्हें दे दी गई, जिसका उन्होंने बखूबी निर्वहन किया.

भगवान शंकर के मंदिर की भी है चमत्कारिक कथा

ओम प्रकाश जायसवाल बताते हैं कि काशीनाथ जायसवाल उनके पिता थे. बतासी देवी के द्वारा ही एक शिव मंदिर का भी निर्माण कराया गया था, उस मंदिर की रक्षा नाग देवता करते थे. ओम प्रकाश जायसवाल ने बताया कि बचपन में वह मंदिर की साफ-सफाई करने के लिए सुबह-सुबह ही पहुंच जाते थे. कई बार उन्हें नाग देवता के दर्शन भी हुए. एक बार तो दरवाजा खोलते ही वह उनके ऊपर आ गिरे. बाद में वह लाठी लेकर उन्हें मारने के लिए पहुंचे, तो वहां से गायब हो गए. उसके बाद भी उन्हें कई बार शिवलिंग में लिपटा हुआ अथवा मंदिर के आसपास घूमता हुआ  नाग दिखाई देता है.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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