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Chhatarpur Temple: छतरपुर के महुई खुर्द गांव में स्थित कल्लाही बाबा बालाजी मंदिर रहस्यमयी चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है. यहां कोई व्यक्ति रात में नहीं रुक सकता, क्योंकि मान्यता है कि स्वयं हनुमान जी रात में विश्…और पढ़ें
कल्लाही बालाजी बाबा मंदिर
हाइलाइट्स
- हनुमान जी स्वयं इस मंदिर के पुजारी नियुक्त करते हैं.
- मंदिर में रात में कोई विश्राम नहीं कर सकता.
- श्रद्धालुओं की मनोकामना यहां पूरी होती है.
छतरपुर. छतरपुर जिले में वैसे तो कई हनुमान मंदिर हैं, लेकिन चंदला से लगभग 12 किलोमीटर दूर महुई खुर्द गांव में स्थित कल्लाही बाबा बालाजी महाराज का मंदिर अपने अद्भुत इतिहास और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां हनुमान जी स्वयं पुजारी तय करते हैं और कोई भी व्यक्ति रात में मंदिर में विश्राम नहीं कर सकता.
मंदिर की देखरेख करने वाले राजा तिवारी बताते हैं कि यह मूर्ति पलाश के पेड़ के नीचे से प्रकट हुई थी. उस समय गांव के लोगों ने मिलकर यहां मंदिर का निर्माण कराया. यह मूर्ति कितनी पुरानी है, इसके बारे में सिर्फ पूर्वजों की बातें ही सुनी जाती हैं. यह मूर्ति कल्लाही बाबा बालाजी महाराज के नाम से जानी जाती है.
रात्रि में नहीं कर सकता कोई विश्राम
राजा तिवारी बताते हैं कि इस मंदिर में कोई भी व्यक्ति रात में विश्राम नहीं कर सकता. चाहे वह कितना भी अमीर हो या वीआईपी. मान्यता है कि हनुमान जी स्वयं रात्रि में यहां विश्राम करते हैं. यदि कोई रुकने की जिद करता है तो उसे किसी न किसी रूप में बाहर कर दिया जाता है.
निकल आते हैं सांप और बिच्छू
अगर कोई व्यक्ति मंदिर में रात बिताने की कोशिश करता है तो वहां सांप, बिच्छू या विषैले जीव निकल आते हैं. इससे व्यक्ति डरकर मंदिर छोड़ देता है. इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति अशुद्ध अवस्था में हनुमान चालीसा या पाठ करने की कोशिश करता है तो वह पाठ नहीं कर पाता.
श्रद्धालुओं की होती है मनोकामना पूरी
यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से कल्लाही बालाजी महाराज के दरबार में आता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है. दिल्ली, हरियाणा, रायपुर, बिलासपुर, जालौन और कानपुर जैसी जगहों से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं.
बागेश्वर धाम से लौटकर आए, यहां मिली राहत
तिवारी बताते हैं कि नांद गांव से एक श्रद्धालु पहले बागेश्वर धाम में 21 पेशी दे चुके थे, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. इसके बाद वे कल्लाही बाबा के दरबार आए और मात्र 5 पेशियों में ही उनकी भौतिक बाधा दूर हो गई.

















