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Chaitra Pradosh Vrat 2025: चैत्र का महीना 15 मार्च से 12 अप्रैल तक चलेगा. आइए जानते हैं कि चैत्र का पहला प्रदोष व्रत कब है.
चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत.
हाइलाइट्स
- चैत्र का पहला प्रदोष व्रत 27 मार्च को है.
- इस दिन भगवान शिव की पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
- प्रदोष व्रत के दिन तीन शुभ योग बन रहे हैं.
देवघर. चैत्र का महीना 15 मार्च से लेकर 12 अप्रैल तक चलेगा. चैत्र का महीना पूजा-पाठ के दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना जाता है. इस महीने में चैत्र नवरात्रि, चैती छठ और रामनवमी जैसे बड़े पर्व मनाए जाते हैं. वहीं, प्रदोष का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित रहता है. इस दिन भगवान भोलेनाथ की प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. आइए जानते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य से कि चैत्र महीने का पहला प्रदोष व्रत कब है और इसका क्या महत्व है.
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने Bharat.one के संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया कि 27 मार्च को चैत्र महीने का पहला प्रदोष व्रत है और यह भौम प्रदोष व्रत है. भौम प्रदोष व्रत के दिन अगर भक्त भगवान शिव की प्रदोष काल में पूजा-अर्चना करें तो भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
त्रयोदशी तिथि की शुरुआत
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि ऋषिकेश पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 मार्च रात 1 बजकर 43 मिनट से हो रही है और समापन 27 मार्च रात 11 बजकर 13 मिनट पर होगा. इसमें उदया तिथि नहीं बल्कि प्रदोष काल देखा जाता है और प्रदोष काल 27 मार्च को है, इसलिए 27 मार्च को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा.
शुभ योग का निर्माण
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि चैत्र माह के पहले प्रदोष व्रत के दिन तीन शुभ योग का निर्माण हो रहा है – साध्य, शुभ और शुक्ल योग। ये योग प्रदोष के दिन को और भी खास बना देते हैं.
प्रदोष व्रत के दिन क्या करें
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि चैत्र माह के पहले प्रदोष व्रत के दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पंचोपचार विधि से पूजा-अर्चना करें. इसके साथ ही भगवान शिव के शिवलिंग पर पंचगव्य या पंचामृत से अभिषेक करें. इससे सारी मनोकामनाएं पूरी होंगी. विशेषकर संतान इच्छुक दंपति को प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए. इसके साथ ही जिनकी विवाह में देरी हो रही है या कुंडली में मंगल दोष है, उन्हें भी भौम प्रदोष के दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए.
Deoghar,Jharkhand
March 14, 2025, 11:20 IST
26 या 27 मार्च, चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत कब? ज्योतिषाचार्य से जानें

















