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45 दिन बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, भारत में इसका कितना होगा प्रभाव, जानें कब और क्या होता है surya grahan

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Solar Eclipse 2025 Date: आज से ठीक 45 दिन बाद यानी 29 मार्च को गहरा आंशिक सूर्य ग्रहण लगेगा. मतलब साफ है कि चंद्रमा सूर्य की सतह के केवल एक हिस्से को ही ढकेगा. अब सवाल है कि इस साल 2025 में कितने ग्रहण लगेंगे? …और पढ़ें

45 दिन बाद साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें भारत में इसका कितना होगा प्रभाव

इस दिन लगेगा साल 2025 का सूर्य ग्रहण. (Image- Canva)

हाइलाइट्स

  • साल 2025 में 4 ग्रहण में 2 चंद्र और 2 आंशिक सूर्य ग्रहण लगने वाले हैं.
  • 29 मार्च को पहला सूर्य ग्रहण लगेगा. यह ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा.
  • यह ग्रहण यूरोप, अफ्रीका देखेगा इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा.

Solar Eclipse 2025 Date: आज से ठीक 45 दिन बाद आसमान में एक चमत्कार होगा. इस दिन यानी 29 मार्च को गहरा आंशिक सूर्य ग्रहण लगेगा. मतलब साफ है कि चंद्रमा सूर्य की सतह के केवल एक हिस्से को ही ढकेगा. ऐसे में खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह जानना रोचक होगा कि, चंद्रमा की केंद्रीय छाया पृथ्वी को छुएगी नहीं. इसका निष्कर्ष यह होगा कि कोई पूर्ण ग्रहण नहीं होगा. अब सवाल है कि इस साल 2025 में कितने ग्रहण लगेंगे? सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण कब-कब लगेगा? भारत में सर्य ग्रहण का क्या प्रभाव होगा? सूर्य ग्रहण कब और क्यों लगता है? सूर्य ग्रहण का भारत में सूतक मान्य होगा या नहीं? इस सवालों के बारे में Bharat.one को बता रहे हैं प्रतापविहार गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-

साल 2025 के सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण

ज्योतिषाचार्य की मानें तो साल 2025 में ग्रहणों की शुरुआत 14 मार्च से होगी और 21 सितंबर को 2025 को अंतिम ग्रहण लगेगा. बता दें कि, 14 मार्च 2025 को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा और इसी माह यानी 29 मार्च को सूर्य ग्रहण भी है. ये दोनों ही ग्रहण भारत में नजर नहीं आएंगे. इसलिए इनका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा.

इस दिन साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण

साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 को लगेगा. यह एक आंशिक सूर्यग्रहण होगा, जो भारत में नहीं दिखेगा. भारतीय समय के मुताबिक, आंशिक सूर्य ग्रहण 29 मार्च को दोपहर 2 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगा.

भारत में सूर्य ग्रहण का क्या होगा प्रभाव

यह खगोलीय घटना यूरोप, एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी. जबकि, भारत में नजर नहीं आएगी. इसलिए भारत में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा.

कब और क्यों लगता है सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण उस स्थिति में होता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है. ऐसी स्थिति होने पर सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसा होने से चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ने लगती है, और सूरज का कुछ ही हिस्सा दिखाई देता है. हालांकि, सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं, आंशिक, वलयाकार और पूर्ण सूर्य ग्रहण.

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