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5 famous Shiva temples of Gumla, one temple is such that the sandalwood tree itself becomes the Shivalinga. – Jharkhand News

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Gumla Top 5 Shiva Mandir : वैसे तो झारखंड के गुमला जिले में भगवान शिव के 5 प्रमुख मंदिर है. इन मंदिरों में टांगीनाथ धाम, बुढ़वा महादेव मंदिर, महा सदाशिव मंदिर, देवगांव और कपिलनाथ मंदिर अपनी प्राचीनता, रहस्यमय मूर्तियों व अनूठी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध हैं.

टांगीनाथ धाम यहां चंदन का पेड़ ही बन गया शिवलिंग

गुमला जिला के डुमरी प्रखंड स्थित टांगीनाथ धाम है. यह भगवान परशुराम की तपोभूमि मानी जाती है. टांगीनाथ धाम चारों ओर हरे भरे पेड़ पौधे, खूबसूरत वादियों के बीच पहाड़ की चोटी में स्थित है. यहां विशेष रूप से भगवान शिव की शिवलिंग व त्रिशूल व भगवान परशुराम की फरसा की पूजा की जाती है. टांगीनाथ की मुख्य विशेषता है कि प्राचीन काल से ही शिव जी का त्रिशूल व भगवान परशुराम का फरसा खुले आसमान के नीचे जमीन में गड़ा हुआ है. यह जमीन के कितने अंदर तक है. यह आज तक रहस्यमय बना हुआ है.

पीपल पेड़ की खोह में शिवलिंग

गुमला जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर 16 करमटोली में बुढ़वा महादेव मंदिर स्थित है. इस मंदिर का इतिहास 100 वर्षों से भी अधिक पुराना है. यह जितना पुराना मंदिर है, इसका इतिहास भी उतना ही अनोखा और विचित्र है. जनश्रुति के अनुसार पीपल के पेड़ की खोह में एक छोटा सा शिवलिंग निकला था. पेड़ की खोह में शिवलिंग को देख स्थानीय लोगों में श्रद्धा जगी और श्रद्धालुओं ने अब भव्य मंदिर का स्वरूप दे दिया .

गुमला का अनोखा 26 मुख 52 भुजा वाले महादेव

गुमला के रायडीह प्रखंड के मरदा गांव स्थित महा सदाशिव मंदिर जिले का सबसे भव्य मंदिर है. यहां 26 मुख और 52 भुजा वाले महादेव विराजते हैं. साथ ही काले पत्थरों से निर्मित 84 अन्य देवी देवता भी हैं. इसकी ऊंचाई लगभग 85 फीट है. गुमला में राज्य का पहला महा सदाशिव मंदिर है एवं भगवान शिव का दुर्लभ स्वरूप प्रतिष्ठित है. मान्यता है कि भगवान शिव के इस रूप के दर्शन मात्र से ही मनुष्यों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. साथ ही परिसर में तरह-तरह के फूल, फल एवं पौधे लगाए गए हैं, जो इनकी शोभा को और बढ़ाते हैं.

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विशाल चट्टान के नीचे गुफा में बसा शिव का परिवार

पालकोट प्रखंड स्थित तपकरा पंचायत स्थित देवगांव, जो विशाल चट्टान के नीचे गुफा में है. पूर्व में तो यह खुला था, लेकिन अब इसे मंदिर का रूप दे दिया गया है. देवगांव अति प्राचीन है और इसकी कथा बड़ी ही रोचक है.देवगांव में बड़ी तादात में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हैं, जिन्हें पत्थरों में तरासा गया है. कहा जाता है कि इसे भगवान विश्वकर्मा ने खुद अपने हाथों से बनाया है. यहां भगवान भोलेनाथ का परिवार रहता है, इसलिए इसे देवगांव कहा जाता है. यहां भगवान गणेश, बजरंगबली, नंदी बाबा, भोलेनाथ, नाग देवता, देवी महारानी, भगवती मुन्नी माता, सूर्य देवता, शिव शक्ति, गौ गंगा माता, गणेश कार्तिक, मां 10 भुजी महारानी सहित अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं हैं.

1643 ई. में पत्थरों से बना कपिलनाथ मंदिर

गुमला जिला के सिसई प्रखंड के नगर गांव स्थित कपिलनाथ मंदिर जिसे नगर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यह जिले का पहला ऐसा मंदिर है. जहां बाबा शिव के साथ भैरव बाबा के भी दर्शन आपको हो जाएंगे. यह मंदिर देखने में भी अनोखा, अद्भुत व आकर्षक है क्योंकि यह पत्थरों से तैयार है. इस मंदिर का निर्माण नागवंशी राजा राम शाह ने दोइसा में संवत 1700 यानी 1643 ई. में कराया था, मंदिर दो तल्ला है व पत्थरों से बना है. मंदिर के ऊपरी भाग में केवल कुछ ईंटों का इस्तेमाल किया गया है. मंदिर के स्तंभों पर सुंदर नक्शा किया गया है और गुंबद की भीतरी छत में घोड़ों व शेरों की आकृति उकेरी हुई है.

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गुमला के ये हैं टॉप 5 शिव मंदिर, यहां दर्शन के लिए लगी रहती है लंबी लाइन

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